औराई/सीताढ़ी। गुरू पूर्णिमा का पर्व रविवार को जिले में मनाया गया। आश्रमों में गुरूजनों की पूजा पूरे श्रद्धा भाव पूर्वक की गई। गुरूओं ने अपने शिष्यों को सन्नमार्ग पर चलने की शिक्षा दी, हालांकि कोरोना वायरस के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों में ही पूजा-अर्चना की।
जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल सीतामढ़ी के महर्षि वाल्मीकि आश्रम में बड़ी संख्या में शिष्यों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आश्रम के महंत गुरू पं हरिप्रसाद मिश्रा शास्त्री का विधिवत दर्शन पूजन कर चरण वंदन किया। गुरू ने अपने शिष्यों को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर चलने का संकल्प दिलाया। शास्त्री जी ने कहा कि प्राचीन काल से ही गुरूओं की पूजा की परंपरा है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा होती है। कहा विद्यार्थी, पुजारी, साधू , महात्मा , शासन एवं सभी धर्मो में भी गुरू शिष्य परंपरा आदि काल से ही चली आ रही है। जैसे आरुणि, सेतुकेतु, अपाला, घोषा, गार्गी, याग्य, बल्क्य,अंगिरा , उद्दालक, इंद्र बृहस्पति तमाम ऋषियों ने गुरु शिष्य परंपरा से ही वेद ,पुराण का प्रचार किया। शिष्यों को सनातन धर्म पर चलने का संदेश दिया और कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए बनाई परंपरा का पालन कर राष्ट्र को सम़ृद्ध बनाएं। इस मौके पर जयशंकर शुक्ला, दिनेश बिंद, ज्ञानेंद्र मिश्र, आकाश आदि रहे। इसी तरह बाबा धवासा नाथ आश्रम में बाबा अमर दास महराज का उनकेे शिष्यों ने दर्शन पूूूजन किया। औराई संवाददाता के अनुसार, अर्जुनपट्टी आश्रम पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर स्वामी लक्ष्मणदास जी महाराज का आशीर्वाद लिया। स्वाजी जी ने कोरोना वायरस के कारण पहले ही शिष्यों को घर पर रहकर पूजा करने के लिए कहा था, जिससे आश्रम में अधिक भक्त नहीं आए। आश्रम के आसपास के लोगों ने पहुंचकर सोशल डिस्टेंसिंग के तहत महाराज लक्ष्मण दास की पूजा की। महाराज ने उन भक्तों को प्रसाद वितरण किया। महाराज ने आश्रम के बाहर सैनिटाइजर पानी की व्यवस्था की थी। इस मौके पर गया मिश्रा, अनिल कुमार दुबे, तारकेश्वर शुक्ला, राकेश शुक्ला, श्याम मिश्रा, सदानंद दूबे, प्रभु नाथ शुक्ला, अमित दुबे आदि रहे।