ज्ञानपुर (भदोही)। जिले के शिक्षण संस्थानों के इर्द-गिर्द नशे का काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। शासन और शिक्षा मंत्रालय की सख्त गाइडलाइन को ताक पर रखकर स्कूलों के मात्र 50 से 100 मीटर के दायरे में शराब, बीयर, भांग, सिगरेट और गुटखा-तंबाकू की दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। किशोर वर्ग और युवाओं को नशे की जानलेवा लत से बचाने के सरकारी दावे जमीनी धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने पहले शिक्षण संस्थानों के आसपास 200 मीटर के दायरे में नशीली वस्तुओं की बिक्री पर रोक लगाई थी। अब इस नियम को और कड़ा करते हुए दायरे को बढ़ाकर 500 मीटर कर दिया गया है। शासन की ओर से जारी कार्ययोजना के तहत वर्तमान शिक्षा सत्र 2026-27 से सभी शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के क्षेत्र को पूरी तरह नशा मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाना है। इसके बावजूद जिम्मेदार महकमे आंखें मूंदे बैठे हैं। शनिवार को की गई पड़ताल में नियमों की धज्जियां उड़ती साफ दिखाई दीं। ज्ञानपुर के विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज से मात्र 20 मीटर, जिला पंचायत बालिका इंटर कॉलेज से महज 10 मीटर और कंपोजिट विद्यालय ज्ञानपुर से 20 से 25 मीटर की दूरी पर ही गुटखा, सिगरेट और तंबाकू के खोखे सजे हैं। इंद्रावती बिंद इंटर कॉलेज गिरधरपुर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर अंग्रेजी शराब की दुकान धड़ल्ले से चल रही है। यह समस्या सिर्फ मुख्यालय तक सीमित नहीं है। गोपीगंज के जिला पंचायत बालिका इंटर कॉलेज व गुलाबधर मिश्र इंटर कॉलेज, सुरियावां के सेवाश्रम इंटर कॉलेज, मोढ़ के सेवासदन इंटर कॉलेज और घनश्याम दूबे डिग्री कॉलेज सरियावां के 50 मीटर के दायरे में ही शराब व अन्य नशे की दुकानें खुल गई हैं। भदोही नगर के एमए समद इंटर कॉलेज, ज्ञानदेवी बालिका इंटर कॉलेज, श्री इंद्र बहादुर नेशनल इंटर कॉलेज और फलाहे उम्मद डिग्री कॉलेज के आसपास भी कमोबेश यही नजारा है, जो छात्रों के भविष्य के साथ सीधे खिलवाड़ है। काशी नरेश राजकीय महाविद्यालय को अब विश्वविद्यालय का दर्जा मिल चुका है। यहां सात से आठ हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। विश्वविद्यालय के पूर्वी गेट के पास ही गुटखा, सिगरेट और तंबाकू की दुकान चलती है। विश्वविद्यालय के 500 मीटर की परिधि में शराब, भांग से लेकर 50 से ज्यादा नशे की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। प्रशासनिक एवं पुलिस महकमे के अफसर इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय के समीप ही एएसपी, सीडीओ समेत अन्य अधिकारियों का आवास भी है। उक्त मार्ग से ही प्रतिदिन जिले के आला अधिकारी भी गुजरते हैं। शिक्षण संस्थानों के पास नशे की ब्रिकी रोकने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स गठित की गई है। इसमें स्वास्थ्य, आबकारी, शिक्षा और खद्यि विभाग के अधिकारी नामित होते हैं। वैसे तो साल में एक या दो बैठकों में अभियान की समीक्षा तो की जाती है लेकिन सबकुछ कागजों पर ही ओके हो जाता है।