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पुरोहित और सेवादारों की मदद करे सरकार
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सीतामढ़ी। कोविड-19 के कारण मार्च से ही धार्मिक स्थलों पर ताला लटका है। अनलॉक एक में मंदिर खुल गए, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या नगण्य है। धार्मिक, मांगलिक, वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजनों में कमी से मंदिर के पुजारी, सेवादारों और पुरोहितों के जीवन यापन पर बुरा असर पड़ा है। धार्मिक स्थलों पर आश्रित तमाम लोग रोजी रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय ने कहा कि सरकार समाज के हर तबके की मदद कर रही है। बड़े धार्मिक संस्थाओं और मंदिरों के पास अपनी व्यवस्था है, लेकिन छोटे मंदिरों, आश्रमों, मठों के पुजारियों, सेवादारों, पुरोहितों और उनके परिजनों का जीवन यापन श्रद्धालुओं के चढ़ावे पर ही आश्रित है। सरकार ऐसे लोगों तत्काल आर्थिक मदद करे। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं हरिप्रसाद मिश्रा शास्त्री ने भी छोटे मंदिरों के सेवादरों की सहायता की मांग की। मंदिरों के पुरोहितों, सेवादारों, पुजारियों के समक्ष कोरोना काल अभिशाप बन कर आया है। सीताधाम आश्रम के महंत दीन बंधु दीनानाथ मौनी बाबा कहते है कि छोटे मंदिर खुले हैं, लेकिन कोरोना के चलते श्रद्धालुओं की संख्या नगण्य है। धवासा नाथ आश्रम के महंत अमर दास जी महाराज का कहना है कि इस विषम परिस्थितियों में हमारी परेशानियों की ओर न तो सरकार का ध्यान दे रही है न जिला प्रशासन, स्वयं सेवी संस्थाएं और समाजसेवियों ने भी चुप्पी साध ली है।
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पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय ने कहा कि सरकार समाज के हर तबके की मदद कर रही है। बड़े धार्मिक संस्थाओं और मंदिरों के पास अपनी व्यवस्था है, लेकिन छोटे मंदिरों, आश्रमों, मठों के पुजारियों, सेवादारों, पुरोहितों और उनके परिजनों का जीवन यापन श्रद्धालुओं के चढ़ावे पर ही आश्रित है। सरकार ऐसे लोगों तत्काल आर्थिक मदद करे। महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं हरिप्रसाद मिश्रा शास्त्री ने भी छोटे मंदिरों के सेवादरों की सहायता की मांग की। मंदिरों के पुरोहितों, सेवादारों, पुजारियों के समक्ष कोरोना काल अभिशाप बन कर आया है। सीताधाम आश्रम के महंत दीन बंधु दीनानाथ मौनी बाबा कहते है कि छोटे मंदिर खुले हैं, लेकिन कोरोना के चलते श्रद्धालुओं की संख्या नगण्य है। धवासा नाथ आश्रम के महंत अमर दास जी महाराज का कहना है कि इस विषम परिस्थितियों में हमारी परेशानियों की ओर न तो सरकार का ध्यान दे रही है न जिला प्रशासन, स्वयं सेवी संस्थाएं और समाजसेवियों ने भी चुप्पी साध ली है।
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