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Bhadohi News: 2400 करोड़ का माल डंप, आठ लाख लोगों का रोजगार दांव पर

Thu, 28 Aug 2025 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:56 AM IST
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Goods dump worth Rs 2400 crore, employment of eight lakh people at stake
नगर स्थित एक इकाई पर कालीन धुलाई करते श्रमिक। स्रोत-संवाद
भदोही। अमेरिकी टैरिफ के बीच कालीन उद्योग में चुनौतियां गहराने लगी है। इस समय अलग-अलग गोदामों में 2400 करोड़ का माल डंप है। भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र के 800 कालीन उत्पादकों के यहां कम से कम आठ लाख लोगों का रोजगार दांव पर लग गया है। कई निर्यातकों ने छंटनी भी शुरू कर दी है। हालांकि अब तक स्पष्ट रूप से यह आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है कि कितने लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है।
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अमेरिका की ओर से थोपा गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स बुधवार से भारतीय उत्पादों लागू हो गया। इससे भारतीय कालीन उद्यमियों में बेचैनी बढ़ गई है। आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) से मिले आंकड़ों के अनुसार भदोही और मिर्जापुर में कुल मिलाकर लगभग 200 कालीन निर्यातक ऐसे होंगे, जिनका कालीन निर्यात 50 करोड़ से लेकर 500 करोड़ तक है। इनमें से 50 प्रतिशत का मुख्य कारोबार अमेरिका से है। ऐसे में आने वाले एक दो महीनों में अमेरिका के टैरिफ का भारतीय कालीन उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। अमेरिका से प्रमुख व्यापार करने वाले निर्यातकों का कहना है कि हम लोगों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। छह माह पहले मिले ऑर्डर जो आज तैयार हैं, उन्हें भी अमेरिकी खरीदारों ने होल्ड करा रखा है। एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल बताते हैं कि अकेले भदोही मिर्जापुर में दर्जनों कालीन उत्पादकों के गोदाम अमेरिका जाने वाले कालीनों से भरे पड़े हैं। नए ऑर्डर की बात कौन करें, आयातक पुराने ऑर्डर तक उठाने को तैयार नहीं हैं।
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भदोही मिर्जापुर कालीन परिक्षेत्र में दो सौ कालीन निर्यातकों के यहां 50 से लेकर 600 तक बुनकर, श्रमिक कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि कई कालीन कारोबारियों ने अपने यहां बुनकरों, मजदूरों की छंटनी करनी शुरू कर दी है। हालांकि कितने बुनकरों की आजीविका गई है, इसका स्पष्ट आंकड़ा अब तक सामने नहीं आ सका है। एकमा के पूर्व मानद सचिव व सीईपीसी के प्रशासनिक समिति सदस्य असलम महबूब ने बताया कि मौजूदा समय में भदोही, मिर्जापुर वाराणसी कालीन परिक्षेत्र में 2400 करोड़ के कालीन गोदामों में डंप पड़े हैं। हर महीने 500 करोड़ के कालीन लूमों पर या तैयारी में होते हैं। जिसमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कुल छोटे-बड़े 800 कालीन उत्पादकों के यहां लगभग आठ लाख लोगों का रोजगार दांव पर लग गया है।
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