{"_id":"577c17934f1c1be6567f9af7","slug":"ganga-puja-festival-starts-with-the-national-ramayana","type":"story","status":"publish","title_hn":" गंगा पूजन के साथ राष्ट्रीय रामायण मेला शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा पूजन के साथ राष्ट्रीय रामायण मेला शुरू
bhadohi hindi news
Updated Wed, 06 Jul 2016 01:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान श्रीराम और जगत जननी माता सीता के सुपुत्रों लवकुश कुमारों की जन्मस्थली सीतामढ़ी में नौ दिवसीय लवकुश जन्मोत्सव राष्ट्रीय रामायण नवमी मेला मंगलवार को गंगा पूजन के साथ आरंभ हो गया। राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन ज्ञानपुर ब्लॉक प्रमुख मनीष मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे देश की पूरी संस्कृति गंगा को ही केंद्र में रखकर बनाई गई है। कहा रामायण इतिहास विषय नहीं है, बल्कि देश की पहचान है। कहा जिसका पुण्य जागृत होता है, वही भक्त भगवत कार्य के लिए समय निकाल पाता है। कहा हमारी पहचान ही रामायण है। सीतामढ़ी भूमि का बखान करते हुए कहा कि इस स्थल का विशिष्ट महत्व है। मानस प्रवीण मनोज चौबे ने श्री रामकथा में महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर लालमणि मिश्रा काशीनाथ पांडेय, चंद्रकांत शुक्ल, श्यामधर तिवारी, डब्बू तिवारी, मिश्रीलाल प्रधान, रमाशंकर ,कल्लू गौड़ आदि मौजूद थे।
ब्लॉक प्रमुख ने कहा की इस धार्मिक मेला का पौराणिक महत्व है। रामायण कालीन युगों की साक्षी सीतामढ़ी में लवकुश कुमारों का जन्म हुआ था। इस स्थल पर प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना आदि कवि महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इस पुनीत स्थल पर पुरातन काल से ही लवकुश जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नवमी मेले का आयोजन होता चला आ रहा है। कहा कि मेले को और वृहद रूप देने की आवश्यकता है। इसी क्रम में सीता धाम मौनी बाबा आश्रम में कथा प्रवचन और मेले का शुभारंभ दीनबंधु दीनानाथ मौनी बाबा ने धार्मिक अनुष्ठान के बीच किया। उड़िया बाबा आश्रम में अखंड श्री प्रभु संकीर्तन का आयोजन किया गया है। बाबा धवासानाथ आश्रम में भी धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई। धार्मिक अनुष्ठान के निमित्त सीता समाहित स्थल मंदिर सहित पूरे परिसर को आकर्षक साज सज्जा दी गई है।
विज्ञापन
गंगा पूजन महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं. हरिप्रसाद मिश्र शास्त्री ने कराया। इस मौके पर अध्यक्ष उमाशंकर शुक्ल, राहुल दुबे, संयोजक मनोज चौबे, सेठ श्यामजी स्वर्णकार, मुन्ना लाल पांडेय, राज किशोर मिश्र, रामधर पांडेय, हौसिला प्रसाद मिश्र, नंघू तिवारी, विनोद पांडेय, राजधर मिश्र, सुरेश केसरवानी, बसंतलाल गौड़, दुर्गेश तिवारी, प्रमोद पांडेय आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे देश की पूरी संस्कृति गंगा को ही केंद्र में रखकर बनाई गई है। कहा रामायण इतिहास विषय नहीं है, बल्कि देश की पहचान है। कहा जिसका पुण्य जागृत होता है, वही भक्त भगवत कार्य के लिए समय निकाल पाता है। कहा हमारी पहचान ही रामायण है। सीतामढ़ी भूमि का बखान करते हुए कहा कि इस स्थल का विशिष्ट महत्व है। मानस प्रवीण मनोज चौबे ने श्री रामकथा में महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर प्रकाश डाला। इस मौके पर लालमणि मिश्रा काशीनाथ पांडेय, चंद्रकांत शुक्ल, श्यामधर तिवारी, डब्बू तिवारी, मिश्रीलाल प्रधान, रमाशंकर ,कल्लू गौड़ आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
ब्लॉक प्रमुख ने कहा की इस धार्मिक मेला का पौराणिक महत्व है। रामायण कालीन युगों की साक्षी सीतामढ़ी में लवकुश कुमारों का जन्म हुआ था। इस स्थल पर प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना आदि कवि महर्षि वाल्मीकि ने की थी। इस पुनीत स्थल पर पुरातन काल से ही लवकुश जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नवमी मेले का आयोजन होता चला आ रहा है। कहा कि मेले को और वृहद रूप देने की आवश्यकता है। इसी क्रम में सीता धाम मौनी बाबा आश्रम में कथा प्रवचन और मेले का शुभारंभ दीनबंधु दीनानाथ मौनी बाबा ने धार्मिक अनुष्ठान के बीच किया। उड़िया बाबा आश्रम में अखंड श्री प्रभु संकीर्तन का आयोजन किया गया है। बाबा धवासानाथ आश्रम में भी धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई। धार्मिक अनुष्ठान के निमित्त सीता समाहित स्थल मंदिर सहित पूरे परिसर को आकर्षक साज सज्जा दी गई है।
विज्ञापन
गंगा पूजन महर्षि वाल्मीकि आश्रम के महंत पं. हरिप्रसाद मिश्र शास्त्री ने कराया। इस मौके पर अध्यक्ष उमाशंकर शुक्ल, राहुल दुबे, संयोजक मनोज चौबे, सेठ श्यामजी स्वर्णकार, मुन्ना लाल पांडेय, राज किशोर मिश्र, रामधर पांडेय, हौसिला प्रसाद मिश्र, नंघू तिवारी, विनोद पांडेय, राजधर मिश्र, सुरेश केसरवानी, बसंतलाल गौड़, दुर्गेश तिवारी, प्रमोद पांडेय आदि उपस्थित रहे।