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‘सुखी जीवन के लिए गांधी के विचार महत्वपूर्ण’
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भदोही। डा.श्यामा प्रसाद राजकीय महाविद्यालय में रविवार से गांधी दर्शन की प्रासंगिकता और भारत की वैश्विक चुनौतियां विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. एचपी सिंह ने कहा महात्मा गांधी के विचार वर्तमान जीवन शैली के विपरीत हैं लेकिन हमारे सुखी जीवन और सुखद भविष्य के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। भारत को आज विभिन्न चुनौतियों का सामना है जिससे निपटने के लिए हमें महात्मा गांधी के विचारों को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा गांधी दर्शन के दो महत्वपूर्ण आधार है। अहिंसा का मतलब कायरता नहीं। मन और कर्म से किसी का अहित न सोचना, क्षमाशील होना, संतोषी और धैर्यवान होना ही अहिंसा का पुजारी होना है। वक्ताओं ने कहा कि सत्य और अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिसे अपनाकर हम आत्मबल युक्त अच्छा मानव और समाज बना कर स्वशासन लाकर आतंकवाद, भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार व अन्य सामाजिक कुरीतियों का सामना कर सकते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ.अनुराधा सिंह ने बताया कि गांधी जी राजनैतिक यात्रा की पृष्ठभूमि बनारस में लिखी गई थी। जहां वे कुल 12 बार आए और हर बार उनके विचार एक नए विषय पर केंद्रित होते थे। हिंदुस्तानी भाषा हिंदी और उर्दू का प्रसार, स्वदेशी और खादी का प्रयोग, हिंदू-मुस्लिम एकता, स्वावलंबन, आत्मनिर्भर भारत और सामाजिक समरसता, छुआछूत और अन्य कुरीतियों से मुक्त सनातन हिंदू धर्म आदि विचार बापू ने बनारस में जनता के समक्ष रखे। प्राचार्य डा. मुरलीधर राम ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. एसएन वर्मा, डॉ. उमाशंकर गुप्ता, डॉ. अतुल कुमार मिश्र, डॉ. संतोष चतुर्वेदी, डॉ.धीरेंद्र सिंह, डॉ.ऋषि प्रताप सिंह, डॉ. शिवाकांत त्रिपाठी आदि ने विचार रखे।
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उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा गांधी दर्शन के दो महत्वपूर्ण आधार है। अहिंसा का मतलब कायरता नहीं। मन और कर्म से किसी का अहित न सोचना, क्षमाशील होना, संतोषी और धैर्यवान होना ही अहिंसा का पुजारी होना है। वक्ताओं ने कहा कि सत्य और अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिसे अपनाकर हम आत्मबल युक्त अच्छा मानव और समाज बना कर स्वशासन लाकर आतंकवाद, भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार व अन्य सामाजिक कुरीतियों का सामना कर सकते हैं।
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मुख्य वक्ता डॉ.अनुराधा सिंह ने बताया कि गांधी जी राजनैतिक यात्रा की पृष्ठभूमि बनारस में लिखी गई थी। जहां वे कुल 12 बार आए और हर बार उनके विचार एक नए विषय पर केंद्रित होते थे। हिंदुस्तानी भाषा हिंदी और उर्दू का प्रसार, स्वदेशी और खादी का प्रयोग, हिंदू-मुस्लिम एकता, स्वावलंबन, आत्मनिर्भर भारत और सामाजिक समरसता, छुआछूत और अन्य कुरीतियों से मुक्त सनातन हिंदू धर्म आदि विचार बापू ने बनारस में जनता के समक्ष रखे। प्राचार्य डा. मुरलीधर राम ने अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. एसएन वर्मा, डॉ. उमाशंकर गुप्ता, डॉ. अतुल कुमार मिश्र, डॉ. संतोष चतुर्वेदी, डॉ.धीरेंद्र सिंह, डॉ.ऋषि प्रताप सिंह, डॉ. शिवाकांत त्रिपाठी आदि ने विचार रखे।
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