नहीं रहे पूर्व सांसद रामरति: भदोही के गांधी ने काशी में ली अंतिम सांस, मुलायम के थे करीबी; BJP से भी जुड़े
रामरति बिंद बिंद करीब छह दशक से राजनीति में सक्रिय रहे। सपा में मुलायम सिंह यादव के करीबी भी थे। वाराणसी के नेवादा स्थित पैतृक आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यकर्ता जुटे थे।
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UP Politics News: समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व सांसद रामरति बिंद (87) का रविवार को पूर्वाह्न 11.55 बजे निधन हो गया। वाराणसी के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह करीब छह दशक से राजनीति में सक्रिय रहे।
मृदुल एवं सरल स्वभाव के कारण लोग उन्हें भदोही का गांधी भी कहते। वह दो बार विधायक, एक बार सांसद भी रहे। उनके निधन की खबर से विभिन्न राजनीतिक दलों ने शोक जताया।
अभोली के नेवादा रोही गांव निवासी रामरति बिंद 70 के दशक से राजनीति में सक्रिय रहे। 1967 में वह चौधरी चरण सिंह की सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े। 1974 में पहली बार ज्ञानपुर सीट से विधायक बने। 1989 में जनता दल से विधायक चुने गए और मंत्री भी बने।
चौधरी चरण सिंह और लोहिया के आंदोलनों में भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी बनाई तो उनके साथ जुड़ गए। सपा का संस्थापक सदस्य होने के नाते वह पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के काफी करीब भी रहे।
लाेगों ने दी श्रद्धांजलि
2002 में सांसद फूलन देवी के निधन के बाद उप चुनाव में सपा से चुनाव लड़े और बसपा के प्रत्याशी नरेंद्र कुशवाहा को हराकर सांसद बने। 2009 में टिकट न मिलने पर वह अपना दल से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। करीब एक साल तक वह बसपा में भी रहे। 2014 में भाजपा में गए, लेकिन टिकट न मिलने पर फिर सपा में आ गए।
करीब 68 साल के राजनीतिक सफर में वह 65 साल तक सपा में रहे। वह अपने पीछे चार बेटे और पांच बेटियों समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष प्रदीप यादव ने बताया कि कुछ दिनों से वह बीमार चल रहे थे। वाराणसी के एक निजी अस्पताल में वह भर्ती थे।
रविवार को दोपहर में निधन हो गया। उनका निधन पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति है। जिसकी भरपाई पार्टी नहीं कर सकेगी। निवर्तमान जिला महासचिव ओम प्रकाश यादव ने बताया कि अंतिम दर्शन के लिए शव को नेवादा स्थित पैतृक आवास पर रखा गया है।