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लापरवाही में पांच हजार विद्यार्थियों की छूटी प्रायोगिक परीक्षा
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कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण जिले में इंटरमीडिएट के करीब पांच हजार विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा छूट गई। जिसको लेकर विद्यार्थी चिंतित हैं। केंद्र निर्धारण के दौरान कॉलेजों की अदला-बदली होने से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। अब वे परीक्षाफल को लेकर चिंतित हैं।
यूपी बोर्ड परीक्षा खत्म होने पर दूसरे चरण में 28 अप्रैल से चार मई तक जिले में प्रायोगिक परीक्षा कराई गई। बोर्ड परीक्षा में निर्धारित केंद्रों में से कई जगह विज्ञान सहित जरूरी विषयों की मान्यता नहीं होने से वहां के बच्चों को आसपास के स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षा के लिए भेजा गया। प्रायोगिक परीक्षा के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ सेे 75 केंद्र बनाए थे, हालांकि इस दौरान विद्यार्थियों का समायोजन कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण बेहतर नहीं हो सका। इससे भौतिक, रसायन, भूगोल, जीव विज्ञान संग अन्य दूसरे विषयों के करीब पांच हजार विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए। इससे परीक्षाफल को लेकर अभ्यर्थी चिंतित हो गए हैं। इस संबंध में 12वीं की छात्रा रागिनी पाल का कहना है कि बोर्ड परीक्षा में जहां केंद्र गया था, वहां प्रैक्टिकल से जुड़े एक विषय की मान्यता थी, जिसके कारण तीन विषयों में अलग-अलग कॉलेजों में जाकर प्रायोगिक परीक्षा देनी पड़ी। कॉलेजों की अदला-बदली से कई छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। छात्र अनुज सरोज ने भी प्रायोगिक परीक्षा की व्यवस्था पर नाराजगी जताई। कहा कि दो विषयों का प्रैक्टिकल दिया गया, लेकिन तीसरे विषय की तिथि कॉलेज से सही नहीं मिलने के कारण वहां नहीं पहुंच सके।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक एनएल गुप्ता का कहना है कि करीब पांच हजार विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। उनकी प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए जल्द ही परिषद से तिथि निर्धारित की जाएगी।
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यूपी बोर्ड परीक्षा खत्म होने पर दूसरे चरण में 28 अप्रैल से चार मई तक जिले में प्रायोगिक परीक्षा कराई गई। बोर्ड परीक्षा में निर्धारित केंद्रों में से कई जगह विज्ञान सहित जरूरी विषयों की मान्यता नहीं होने से वहां के बच्चों को आसपास के स्कूलों में प्रायोगिक परीक्षा के लिए भेजा गया। प्रायोगिक परीक्षा के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ सेे 75 केंद्र बनाए थे, हालांकि इस दौरान विद्यार्थियों का समायोजन कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण बेहतर नहीं हो सका। इससे भौतिक, रसायन, भूगोल, जीव विज्ञान संग अन्य दूसरे विषयों के करीब पांच हजार विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए। इससे परीक्षाफल को लेकर अभ्यर्थी चिंतित हो गए हैं। इस संबंध में 12वीं की छात्रा रागिनी पाल का कहना है कि बोर्ड परीक्षा में जहां केंद्र गया था, वहां प्रैक्टिकल से जुड़े एक विषय की मान्यता थी, जिसके कारण तीन विषयों में अलग-अलग कॉलेजों में जाकर प्रायोगिक परीक्षा देनी पड़ी। कॉलेजों की अदला-बदली से कई छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। छात्र अनुज सरोज ने भी प्रायोगिक परीक्षा की व्यवस्था पर नाराजगी जताई। कहा कि दो विषयों का प्रैक्टिकल दिया गया, लेकिन तीसरे विषय की तिथि कॉलेज से सही नहीं मिलने के कारण वहां नहीं पहुंच सके।
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इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक एनएल गुप्ता का कहना है कि करीब पांच हजार विद्यार्थी प्रायोगिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। उनकी प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए जल्द ही परिषद से तिथि निर्धारित की जाएगी।
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