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खतौनी के लिए भटक रहे पांच हजार किसान

Mon, 09 Dec 2019 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Dec 2019 11:51 PM IST
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Five thousand farmers are wandering
ज्ञानपुर। चकबंदी के चक्रव्यूह के लचते डीघ ब्लॉक के डीघ गांव के करीब पांच हजार किसानों को खतौनी नहीं मिल पा रही है। इससे विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। तहसील, चकबंदी कार्यालय का चक्कर काटते-काटते किसानों की चप्पलें घिस जा रही है लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
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चार से पांच दशक पूर्व जिले में चकबंदी शुरू हुई थी, किन्ही कारणों से डीघ समेत कुछ गावों की चकबंदी नहीं हो सकी। उसके बाद आज तक चकबंदी न होने के कारण यहां की खसरा-खतौनी नहीं मिल पा रही है। प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई पहल नहीं हो सकी। किसान लेखपाल से लेकर तहसील का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो रहा। आलम यह है कि किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उपकरण, खाद-बीज आदि का लाभ नहीं ले पाते। डीघ गांव में राजेंद्र दूबे, माताचरन तिवारी, प्रमोद दूबे, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, श्यामधर चौबे, अजय सिंह, बहपूरा में पंडित पहलवान, दरोगा पांडेय, शिव चंद्र शुक्ला, भभौरी में अनिल पांडेय, शिलाशंकर, मातादुलार और धनतुलसी में छोटेलाल शुक्ला, श्रीकांत देवराज सिंह, श्री कांत शुक्ल, पंकज सिंह समेत अन्य किसान प्रभावित हैं। चारो गांवों के तमाम किसानों के नाम गंगा तरी की जमीनें हैं, जो बतौर भूमिधरी दर्ज हैं।
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राष्ट्रीय पंचायती राज प्रधान संगठन के प्रदेश सचिव और प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र मिश्र शंकराचारी ने कहा कि समस्या को लेकर डीएम और राजस्व मंत्री तक पत्रक भेजा है, हालांकि अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। प्रशासन इस समस्या का निवारण कराए, जिससे लोगों को सहूलियत मिल सके।
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