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Bhadohi News: दरूनहां गांव के ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार बहाल,
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ज्ञानपुर। भदोही ब्लॉक के दरूनहां गांव के ग्राम प्रधान को हाईकोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने ग्राम प्रधान के वित्तिय अधिकार को बहाल कर दिया है। तत्कालीन डीएम के आदेश पर रोक लगा दी है। गांव के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी गौरांग राठी ने ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार को सीज कर दिया था। प्रधान ने कोर्ट में रिट दाखिल कर डीएम के आदेश पर रोक लगाने की अपील की थी। कोर्ट में प्रधान के अधिवक्ताओं ने जांच में जिला स्तरीय अधिकारियों के न होने का हवाला दिया था। मामले में बहस के बाद न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने आदेश पर रोक लगाने का फैसला सुनाया।
दरुनहा गांव निवासी उपेंद्र सिंह एवं अन्य ग्रामीणों ने 3 मार्च 2023 को जिलाधिकारी को हलफनामा देकर दो पंचवर्षीय में गांव में कराए गए इंटरलॉकिंग, पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय और मनरेगा संबंधित कार्यों में धांधली और गबन का आरोप लगाया गया था। उपायुक्त स्वतः रोजगार, सहायक अभियंता लोक निर्माण एवं जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की टीम ने मामले की जांच की थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल की बाउंड्री निर्माण में अपनी भाभी के फर्म से ग्राम प्रधान अखिलेश प्रकाश सिंह ने ईंट की खरीदारी की, चौरी दरूनहा मार्ग पर जूनियर हाईस्कूल तक चकरोड निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल पाया गया। ग्राम पंचायत की जांच में अधिकारियों ने 17 लाख 41 हजार 837 रुपये की धांधली पाई। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को सीज़ कर सचिव, तकनीकी सहायक को निलंबित कर दिया था। करीब पखवारे भर पूर्व डीएम की संस्तुति पर तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई। ग्राम प्रधान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट एकल खंडपीठ के न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल ने डीएम के आदेश पर रोक लगा दिया। प्रधान की ओर से हाईकोर्ट में की गई अपील पर अधिवक्ता अखिलेश तिवारी और विनायक मित्तल ने बहस की।
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दरुनहा गांव निवासी उपेंद्र सिंह एवं अन्य ग्रामीणों ने 3 मार्च 2023 को जिलाधिकारी को हलफनामा देकर दो पंचवर्षीय में गांव में कराए गए इंटरलॉकिंग, पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय और मनरेगा संबंधित कार्यों में धांधली और गबन का आरोप लगाया गया था। उपायुक्त स्वतः रोजगार, सहायक अभियंता लोक निर्माण एवं जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी की टीम ने मामले की जांच की थी। जांच रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल की बाउंड्री निर्माण में अपनी भाभी के फर्म से ग्राम प्रधान अखिलेश प्रकाश सिंह ने ईंट की खरीदारी की, चौरी दरूनहा मार्ग पर जूनियर हाईस्कूल तक चकरोड निर्माण में घटिया ईंटों का इस्तेमाल पाया गया। ग्राम पंचायत की जांच में अधिकारियों ने 17 लाख 41 हजार 837 रुपये की धांधली पाई। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम गौरांग राठी ने ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को सीज़ कर सचिव, तकनीकी सहायक को निलंबित कर दिया था। करीब पखवारे भर पूर्व डीएम की संस्तुति पर तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई। ग्राम प्रधान ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दाखिल किया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट एकल खंडपीठ के न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल ने डीएम के आदेश पर रोक लगा दिया। प्रधान की ओर से हाईकोर्ट में की गई अपील पर अधिवक्ता अखिलेश तिवारी और विनायक मित्तल ने बहस की।
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