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Bhadohi News: गोपीगंज सीएचसी में 41 दिनों से मरीजों को बांटी जा रही हैं एक्सपायर्ड दवाएं
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गोपीगंज। सीएचसी गोपीगंज में बीते 41 दिन से एक्सपायरी तिथि की दवाएं वितरित की जा रही हैं। जिम्मेदारों ने इस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया।
मामले की जानकारी तब हुई जब शुक्रवार को जहागीराबाद के रहने वाले मनोज कुमार अपने बेटे यथार्थ का इलाज कराने आए। उनके बेटे की आंख लाल थी। साथ ही आंख में चुभन और खुजली हो रही थी। उन्होंने डॉ. नंदलाल को ओपीडी में दिखाया।
उन्होंने पर्चे पर दवा लिखी। इसके बाद वह काउंटर पर दवा लेने पहुंचे तो उन्हें दवा दे दी गई। इसके बाद वह दवा लेकर पुन: डॉक्टर के पास गए। डॉ. नंदलाल ने उन्हें दवा कैसे लेनी है। उस पर मार्क भी कर दिया।
बावजूद डॉक्टर की नजर दवा की एक्सपायरी तिथि पर नजर नहीं पड़ी। मरीज दवा लेकर गोपीगंज स्थित अपनी दुकान पर चला गया। दोपहर में जब बेटे को वह दवा खिलाने लगा तो उसकी नजर दवा की एक्सपायरी तिथि पर पड़ी। जो मई 2025 में एक्सपायर हो चुकी थी। छह जून 2023 को दवा मैनुफैक्चरिंग हुई थी। इसके बाद वह फिर सीएचसी पहुंचा।
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डॉक्टरों से सवाल किया। तब डॉक्टर जवाब देने से बचते रहे। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो चिकित्सक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए जांच कराने की बात कहने लगे।
बड़ा सवाल यह है कि गोपीगंज सीएचसी में रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी होती है। न जाने कितने मरीजों को बीते 41 दिनों में यह दवा दी गई होगी।
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मामले की जानकारी तब हुई जब शुक्रवार को जहागीराबाद के रहने वाले मनोज कुमार अपने बेटे यथार्थ का इलाज कराने आए। उनके बेटे की आंख लाल थी। साथ ही आंख में चुभन और खुजली हो रही थी। उन्होंने डॉ. नंदलाल को ओपीडी में दिखाया।
उन्होंने पर्चे पर दवा लिखी। इसके बाद वह काउंटर पर दवा लेने पहुंचे तो उन्हें दवा दे दी गई। इसके बाद वह दवा लेकर पुन: डॉक्टर के पास गए। डॉ. नंदलाल ने उन्हें दवा कैसे लेनी है। उस पर मार्क भी कर दिया।
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बावजूद डॉक्टर की नजर दवा की एक्सपायरी तिथि पर नजर नहीं पड़ी। मरीज दवा लेकर गोपीगंज स्थित अपनी दुकान पर चला गया। दोपहर में जब बेटे को वह दवा खिलाने लगा तो उसकी नजर दवा की एक्सपायरी तिथि पर पड़ी। जो मई 2025 में एक्सपायर हो चुकी थी। छह जून 2023 को दवा मैनुफैक्चरिंग हुई थी। इसके बाद वह फिर सीएचसी पहुंचा।
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डॉक्टरों से सवाल किया। तब डॉक्टर जवाब देने से बचते रहे। मामला जब तूल पकड़ने लगा तो चिकित्सक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए जांच कराने की बात कहने लगे।
बड़ा सवाल यह है कि गोपीगंज सीएचसी में रोजाना 300 मरीजों की ओपीडी होती है। न जाने कितने मरीजों को बीते 41 दिनों में यह दवा दी गई होगी।