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Bhadohi: छठ पर्व का उत्साह, 21 घाटों पर 5500 व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया

Thu, 07 Nov 2024 07:53 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Thu, 07 Nov 2024 07:53 PM IST
सार

भदोही  के ज्ञानपुर में छठ पर्व की धूम है 21 घाटों पर 5500 व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया।दो घंटे तक पानी में खड़े रहकर भगवान भास्कर के अस्त होने का इंतजार किया। भगवान भास्कर शाम पांच बजकर 25 मिनट पर अस्त हुए और भक्तों में उत्साह देखने को मिला। शुक्रवार को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर करेंगी व्रत का पारण करेंगी।

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Excitement of Chhath festival 5500 fasting women offered water to the setting sun at 21 ghats
शाम का अर्घ्य देते भक्त - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जोड़े, जोड़े फलवा, सूरज देव घटवा पर दियली जलाई लैं हो..... लोकआस्था के महापर्व डाला छठ पर बृहस्पतिवार को जिले के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जिले के 21 घाटों पर साढे पांच हजार व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण घाटों की सीढि़यां भरी रहीं। व्रती महिलाओं ने करीब दो घंटे तक पानी में खड़े रहकर भगवान भास्कर के अस्त होने का इंतजार किया। शुक्रवार को व्रती महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के व्रत का पारण करेंगी।

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लोकआस्था के महापर्व डाला छठ को लेकर व्रती महिलाएं चार से पांच दिन पहले सही तैयारियों में जुटी हुई थी। मंगलवार को नहाय खाय के साथ व्रत शुरू हुआ। इस दिन महिलाओं ने भोजन के रूप में कद्दू, चने की दाल और चावल ग्रहण किया। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद ही भोजन किए। इसके बाद बुधवार को खरना मनाया गया। इस दिन महिलाएं दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को भोजन किया ओर प्रसाद के रूप में गन्ने के रस से बनी चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी लगी रोटी बना कर प्रसाद ग्रहण किया।
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बृहस्पतिवार को दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ का प्रसाद बनाया। दोपहर दो बजते ही महिलाओं की भीड़ घाटों की ओर रवाना होने लगी। बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाकर महिलाएं छठ माता के भजन गाती हुई घाटों पर पहुंची और विधिवत अराधना के बाद जलाशय में पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर के अस्त होने का इंतजार करने लगी। शाम पांच बजकर 25 मिनट पर सूर्यास्त होने के पहले ही महिलाओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया।

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