{"_id":"60f5ab6b8ebc3e6d301fa876","slug":"employees-are-playing-lakhs-in-residential-allowance-bhadohi-news-vns6013524131","type":"story","status":"publish","title_hn":"आवासीय भत्ते में कर्मचारी कर रहे लाखों का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आवासीय भत्ते में कर्मचारी कर रहे लाखों का खेल
विज्ञापन
जिले के सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी एचआरए (आवासीय भत्ते) में लाखों का खेल कर रहे हैं। सरकारी आवास में रहकर भी भत्ता ले रहे हैं। सीएचसी गोपीगंज में आरटीआई से मांगी गई जानकारी में खुलासा होने पर फार्मासिस्ट समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस भेजा गया। यह तो एक बानगी भर है।
दरअसल विकास भवन, बेसिक शिक्षा, कलेक्ट्रेट सहित अन्य विभागों के कर्मचारी भी एचआरए से सरकार को हर महीने लाखों का चूना लगा रहे हैं। शासन का निर्देश है कि सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी तहसील, जिला मुख्यालय पर ही निवास करें। जिससे आम जन से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके। इसके लिए कर्मचारियों को एचआरए यानी आवासीय भत्ता दिया जाता है, लेकिन जिले में कई विभागों के कर्मचारी सरकारी आवासों पर कब्जा कर रहते हैं और एचआरए का भी भुगतान ले रहे हैं। गोपीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुजरे तीन दशक से शासनादेश तार-तार हो रहा है।
अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने सीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट, एएनएम और कर्मचारी से जुड़े एचआरए की सूचना अधीक्षक से मांगी थी। तीनों कर्मचारी सीएचसी परिसर में ही सरकारी आवास में कई साल से रहते हैं। आरटीआई से मांगी सूचना में कर्मचारी मूलचंद्र ने तीन दशक में करीब चार लाख, एएनएम रीना ने छह साल तीन माह में 83 हजार और फार्मासिस्ट सुजीत कुमार तीन साल छह माह में 46 हजार 620 रुपये एचआरए लिया। इसको लेकर अधीक्षक आशुतोष पांडेय ने नोटिस जारी कर आवास को खाली करने की हिदायत दी, लेकिन अब तक वे आवास नहीं खाली किए। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने डीएम और सीएमओ को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। सीएमओ डा. संतोष कुमार चक ने कहा कि मामले को दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बयान...........
सरकारी आवास में रहने के बाद भी आवासीय भत्ता का लाभ लेना गलत है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर रिकवरी कराई जाएगी।- आर्यका अखौरी डीएम भदोही
विज्ञापन
दरअसल विकास भवन, बेसिक शिक्षा, कलेक्ट्रेट सहित अन्य विभागों के कर्मचारी भी एचआरए से सरकार को हर महीने लाखों का चूना लगा रहे हैं। शासन का निर्देश है कि सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी तहसील, जिला मुख्यालय पर ही निवास करें। जिससे आम जन से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके। इसके लिए कर्मचारियों को एचआरए यानी आवासीय भत्ता दिया जाता है, लेकिन जिले में कई विभागों के कर्मचारी सरकारी आवासों पर कब्जा कर रहते हैं और एचआरए का भी भुगतान ले रहे हैं। गोपीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गुजरे तीन दशक से शासनादेश तार-तार हो रहा है।
विज्ञापन
अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने सीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट, एएनएम और कर्मचारी से जुड़े एचआरए की सूचना अधीक्षक से मांगी थी। तीनों कर्मचारी सीएचसी परिसर में ही सरकारी आवास में कई साल से रहते हैं। आरटीआई से मांगी सूचना में कर्मचारी मूलचंद्र ने तीन दशक में करीब चार लाख, एएनएम रीना ने छह साल तीन माह में 83 हजार और फार्मासिस्ट सुजीत कुमार तीन साल छह माह में 46 हजार 620 रुपये एचआरए लिया। इसको लेकर अधीक्षक आशुतोष पांडेय ने नोटिस जारी कर आवास को खाली करने की हिदायत दी, लेकिन अब तक वे आवास नहीं खाली किए। अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने डीएम और सीएमओ को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। सीएमओ डा. संतोष कुमार चक ने कहा कि मामले को दिखवाकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
बयान...........
सरकारी आवास में रहने के बाद भी आवासीय भत्ता का लाभ लेना गलत है। ऐसे लोगों को चिह्नित कर रिकवरी कराई जाएगी।- आर्यका अखौरी डीएम भदोही