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बाढ़ के चलते पशु पालकों की बढ़ी मुसीबत
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हाईवे के किनारे शौचालय के सामने बैठे मवेशी। संवाद
- फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। जिले के तटवर्ती इलाकों में बीते 10 दिनों से बाढ़ का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बाढ़ के चलते सैकड़ों एकड़ फसलों के डूब जाने और रिहायशी इलाकों के कच्चे-पक्के घरों में पानी घुसने के कारण दर्जनों परिवार सुरक्षित स्थान पर शरण लेने के लिए मजबूर हैं ।
दरअसल भुसौल, पशुशाला के डूबते ही तटवासी पालतू पशुओं को लेकर चिंता आसमान छू रही है। जैसे-जैसे बाढ़ का असर बढ़ रहा है वैसे-वैसे पशुओं का पलायन भी नगरों की शुरू हो गया है। इस संबंध में किसान बुद्धन, लहुरीराम, रामआसरे, बुधवा देवी, सुखदेई, मनोहरलाल ने बताया कि बाढ़ के कारण अब परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। बाढ़ से भुसौल में रखे भूसे, पुआल की कुट्टी, खेतों में बोए गए हरे चारे पूरी तरह से बर्बाद होने पर पालतू पशुओं की देखभाल करना सामर्थ्य से बाहर है। कई परिवारों ने अच्छी नस्ल की गाय, बछड़े, बछिया तक को भगवान भरोसे छोड़ दिया है कि सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंच कर अपनी सुरक्षा कर लेंगी। बाढ़ पैकेज में जिला प्रशासन विभागवार जिम्मेदारी दी गई लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से अभी तक चारा की व्यवस्था नहीं कराया जा सका और टीकाकरण भी कागजों पर किया जा रहा है। तटवर्ती इलाकों से गोपीगंज, जंगीगंज, सूफीनगर-गोधना, ऊंज, नवधन, सुधवैं, लालानगर, नटवां, अमवांमाफी, खमरि या, महाराजगंज, बाबूसराय तक राजमार्ग से जुड़े बाजारों में पशुओं की संख्या बढ़ते ही विभाग पर सवाल उठना शुरू हो गया।
बाजारीवासी जयनरेश, शंभूनाथ, महेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में 22 अस्थाई, एक स्थाई गोशाला कार्यरत हैं। तटवर्ती इलाकों से पलायन होने वाले पशुओं को संरक्षण नहीं मिल सका। बताया कि राजमार्ग समेत अन्य सहायक मार्गों के किनारे, दुकानों के अंदर, टिनशेड, सार्वजनिक शौचालयों के इर्द-गिर्द पशुओं का झुंड देखे जा रहे हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राजमार्ग पर कई पशु वाहनों की चपेट में भी आ चुके हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.जय सिंह ने बताया कि तटवर्ती क्षेत्र में 33 सदस्यीय टीम टीकाकरण में लग चुकी है। चारा के लिए जब तक जिला प्रशासन बजट तय नहीं करेगा तब तक चारा को उपलब्ध कराकर पशुओं का पलायन रोक पाना संभव नहीं है।
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दरअसल भुसौल, पशुशाला के डूबते ही तटवासी पालतू पशुओं को लेकर चिंता आसमान छू रही है। जैसे-जैसे बाढ़ का असर बढ़ रहा है वैसे-वैसे पशुओं का पलायन भी नगरों की शुरू हो गया है। इस संबंध में किसान बुद्धन, लहुरीराम, रामआसरे, बुधवा देवी, सुखदेई, मनोहरलाल ने बताया कि बाढ़ के कारण अब परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। बाढ़ से भुसौल में रखे भूसे, पुआल की कुट्टी, खेतों में बोए गए हरे चारे पूरी तरह से बर्बाद होने पर पालतू पशुओं की देखभाल करना सामर्थ्य से बाहर है। कई परिवारों ने अच्छी नस्ल की गाय, बछड़े, बछिया तक को भगवान भरोसे छोड़ दिया है कि सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंच कर अपनी सुरक्षा कर लेंगी। बाढ़ पैकेज में जिला प्रशासन विभागवार जिम्मेदारी दी गई लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से अभी तक चारा की व्यवस्था नहीं कराया जा सका और टीकाकरण भी कागजों पर किया जा रहा है। तटवर्ती इलाकों से गोपीगंज, जंगीगंज, सूफीनगर-गोधना, ऊंज, नवधन, सुधवैं, लालानगर, नटवां, अमवांमाफी, खमरि या, महाराजगंज, बाबूसराय तक राजमार्ग से जुड़े बाजारों में पशुओं की संख्या बढ़ते ही विभाग पर सवाल उठना शुरू हो गया।
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बाजारीवासी जयनरेश, शंभूनाथ, महेंद्र सिंह ने कहा कि जिले में 22 अस्थाई, एक स्थाई गोशाला कार्यरत हैं। तटवर्ती इलाकों से पलायन होने वाले पशुओं को संरक्षण नहीं मिल सका। बताया कि राजमार्ग समेत अन्य सहायक मार्गों के किनारे, दुकानों के अंदर, टिनशेड, सार्वजनिक शौचालयों के इर्द-गिर्द पशुओं का झुंड देखे जा रहे हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राजमार्ग पर कई पशु वाहनों की चपेट में भी आ चुके हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.जय सिंह ने बताया कि तटवर्ती क्षेत्र में 33 सदस्यीय टीम टीकाकरण में लग चुकी है। चारा के लिए जब तक जिला प्रशासन बजट तय नहीं करेगा तब तक चारा को उपलब्ध कराकर पशुओं का पलायन रोक पाना संभव नहीं है।
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