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Bhadohi News: तकनीकी पेंच के कारण ध्वस्त नहीं हो सकीं रेलवे की जर्जर कॉलोनियां
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पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह-प्रयागराज रेल स्थित दर्जनों जर्जर कॉलोनियां अनहोनी को न्योता दे रही हैं। तकनीकी पेंच फंसने के कारण इन कॉलोनियों को ध्वस्त नहीं किया जा सका है। लोगों ने वाराणसी रेल मंडल प्रशासन से जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित हुई कॉलोनियों को ध्वस्त कराए जाने की मांग की है।
जिले में सबसे अधिक जर्जर हालत में माधोसिंह-प्रयागराज रेल खंड स्थित जंगीगंज हाल्ट कॉलोनी है। हाल्ट पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि जब भी जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित कॉलोनी पर नजर पड़ती है तो अनहोनी की संभावना से मन भर जाता है। निराश्रित व वनवासियों की टोली अक्सर इन भवनों में शरण ले लेती हैं। इसके अलावा पालतू पशुओं को चराने वाले बच्चे भी धूप और बारिश से बचने के लिए यहां पहुंच जाते हैं। ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह का भी यहीं हाल है। लोगाें का कहना है कि पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन जर्जर हाल में पड़ी कॉलोनियों को ध्वस्त करने और आवासीय योग्य कक्षों का कायाकल्प कराने की मांग की है। सेक्शन इंजीनियर कार्य माधोसिंह-प्रयागराज रेल खंड अनिल यादव ने बताया कि माधोसिंह सेक्शन में जर्जर पड़ी कॉलोनियों को ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। तीन माह पूर्व ध्वस्तीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन भी मांगे गए, लेकिन तकनीकी पेंच फंसने से ध्वस्तीकरण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। पुन: मंडल प्रशासन तक पत्राचार कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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जिले में सबसे अधिक जर्जर हालत में माधोसिंह-प्रयागराज रेल खंड स्थित जंगीगंज हाल्ट कॉलोनी है। हाल्ट पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि जब भी जर्जर और निष्प्रयोज्य घोषित कॉलोनी पर नजर पड़ती है तो अनहोनी की संभावना से मन भर जाता है। निराश्रित व वनवासियों की टोली अक्सर इन भवनों में शरण ले लेती हैं। इसके अलावा पालतू पशुओं को चराने वाले बच्चे भी धूप और बारिश से बचने के लिए यहां पहुंच जाते हैं। ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह का भी यहीं हाल है। लोगाें का कहना है कि पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन जर्जर हाल में पड़ी कॉलोनियों को ध्वस्त करने और आवासीय योग्य कक्षों का कायाकल्प कराने की मांग की है। सेक्शन इंजीनियर कार्य माधोसिंह-प्रयागराज रेल खंड अनिल यादव ने बताया कि माधोसिंह सेक्शन में जर्जर पड़ी कॉलोनियों को ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। तीन माह पूर्व ध्वस्तीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन भी मांगे गए, लेकिन तकनीकी पेंच फंसने से ध्वस्तीकरण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। पुन: मंडल प्रशासन तक पत्राचार कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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