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Bhadohi News: उम्र के पड़ाव को पीछे छोड़ 3500 किमी पैदल यात्रा के निकले श्रद्धालु
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महादेव शुक्ला
सीतामढ़ी। अडिग आस्था और अटूट आत्मविश्वास के अद्भुत संगम के बीच महाराष्ट्र से 48 श्रद्धालुओं का 70 दिनों की पैदल तीर्थयात्रा पर निकला है। बुधवार को श्रद्धालुओं का दल मां सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी पहुंचा। उम्र के नंबर को पीछे छोड़ रहे यह श्रद्धालु महाराष्ट्र के भीमांशकर ज्योर्तिलिंग से काशी विश्वनाथ की यात्रा को निकले हैं। लगभग 3500 किमी की इस यात्रा में अब तक श्रद्धालु 2800 किमी की पैदल यात्रा पूरी कर चुके हैं। बीते 16 फरवरी को सभी श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में भी पुण्य की डुबकी लगाई। श्री चैतन्य काशी विश्वेश्वर संस्था ओत्तूर से जुड़े 48 श्रद्धालुओं का जत्था महाराष्ट्र के भीमाशंकर के पास ओत्तूर से पैदल चल रहा है। हजारों किमी की इस पैदल यात्रा में किसी की उम्र 66 साल है तो कोई 70 साल के आसपास है। हर श्रद्धालु उम्र के 50 बसंत को पार कर लिए हैं। आत्मविश्वास, श्रद्धा और भक्ति के इस अद्भुत संगत को देखकर हर कोई दंग रह जा रहा है। श्रद्धालुओं का नेतृत्व कर रहे सुभाष हडवाले ने बताया कि 27 दिसम्बर 2024 को 48 श्रद्धालुओं का जत्था 70 दिवसीय पैदल यात्रा पर देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन पूजन को निकला है। बताया कि अब तक की यात्रा में नासिक ओंकारेश्वर, उज्जैन महाकालेश्वर, चित्रकूट आदि धर्म स्थलों से होते हुए 16 फरवरी को प्रयागराज महाकुंभ में डुबकी लगाई। अब तक 2800 किमी की यात्रा कर चुके श्रद्धालु अब भी पूरी ऊर्जा से भरे हुए हैं। अमर उजाला के साथ खास बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया कि उनकी यह धार्मिक यात्रा सनातन के उत्थान को लेकर है। इतनी लंबी पैदल यात्रा पर थकने के सवाल पर उनका कहना था कि ईश्वर के भजन-किर्तन के साथ लगातार चल रहे इस यात्रा में अब तक कोई विशेष थकान नहीं महसूस हुई है।
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चार घंटे तक किया सीतामढ़ी धाम में प्रवास
48 श्रद्धालुओं का यह जत्था करीब 10 बजे सुबह सीमा समाहित स्थल पहुंचा। इस दौरान भक्तों ने माता सीता के साथ विश्वप्रसिद्ध 108 फीट ऊंचे हनुमान जी का दर्शन पूजन किया। वहीं करीब चार घंटे तक सीतामढ़ी में प्रवास के बाद वे काशी विश्वनाथ धाम के लिए भजन-कीर्तन करते हुए निकल गए। इनके जत्थे में आठ महिला श्रद्धालुओं के साथ 40 पुरुष श्रद्धालु हैं। श्रद्धालुओं के साथ एक ट्रक भी चलती है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं का भोजन, कपड़ा आदि सामान रहता है। सीतामढ़ी में स्थानीय सभाजीत मिश्रा, बबलू पांडेय, सरकार शुक्ला आदि ने पैदल श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
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सीतामढ़ी। अडिग आस्था और अटूट आत्मविश्वास के अद्भुत संगम के बीच महाराष्ट्र से 48 श्रद्धालुओं का 70 दिनों की पैदल तीर्थयात्रा पर निकला है। बुधवार को श्रद्धालुओं का दल मां सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी पहुंचा। उम्र के नंबर को पीछे छोड़ रहे यह श्रद्धालु महाराष्ट्र के भीमांशकर ज्योर्तिलिंग से काशी विश्वनाथ की यात्रा को निकले हैं। लगभग 3500 किमी की इस यात्रा में अब तक श्रद्धालु 2800 किमी की पैदल यात्रा पूरी कर चुके हैं। बीते 16 फरवरी को सभी श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में भी पुण्य की डुबकी लगाई। श्री चैतन्य काशी विश्वेश्वर संस्था ओत्तूर से जुड़े 48 श्रद्धालुओं का जत्था महाराष्ट्र के भीमाशंकर के पास ओत्तूर से पैदल चल रहा है। हजारों किमी की इस पैदल यात्रा में किसी की उम्र 66 साल है तो कोई 70 साल के आसपास है। हर श्रद्धालु उम्र के 50 बसंत को पार कर लिए हैं। आत्मविश्वास, श्रद्धा और भक्ति के इस अद्भुत संगत को देखकर हर कोई दंग रह जा रहा है। श्रद्धालुओं का नेतृत्व कर रहे सुभाष हडवाले ने बताया कि 27 दिसम्बर 2024 को 48 श्रद्धालुओं का जत्था 70 दिवसीय पैदल यात्रा पर देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन पूजन को निकला है। बताया कि अब तक की यात्रा में नासिक ओंकारेश्वर, उज्जैन महाकालेश्वर, चित्रकूट आदि धर्म स्थलों से होते हुए 16 फरवरी को प्रयागराज महाकुंभ में डुबकी लगाई। अब तक 2800 किमी की यात्रा कर चुके श्रद्धालु अब भी पूरी ऊर्जा से भरे हुए हैं। अमर उजाला के साथ खास बातचीत में श्रद्धालुओं ने बताया कि उनकी यह धार्मिक यात्रा सनातन के उत्थान को लेकर है। इतनी लंबी पैदल यात्रा पर थकने के सवाल पर उनका कहना था कि ईश्वर के भजन-किर्तन के साथ लगातार चल रहे इस यात्रा में अब तक कोई विशेष थकान नहीं महसूस हुई है।
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चार घंटे तक किया सीतामढ़ी धाम में प्रवास
48 श्रद्धालुओं का यह जत्था करीब 10 बजे सुबह सीमा समाहित स्थल पहुंचा। इस दौरान भक्तों ने माता सीता के साथ विश्वप्रसिद्ध 108 फीट ऊंचे हनुमान जी का दर्शन पूजन किया। वहीं करीब चार घंटे तक सीतामढ़ी में प्रवास के बाद वे काशी विश्वनाथ धाम के लिए भजन-कीर्तन करते हुए निकल गए। इनके जत्थे में आठ महिला श्रद्धालुओं के साथ 40 पुरुष श्रद्धालु हैं। श्रद्धालुओं के साथ एक ट्रक भी चलती है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं का भोजन, कपड़ा आदि सामान रहता है। सीतामढ़ी में स्थानीय सभाजीत मिश्रा, बबलू पांडेय, सरकार शुक्ला आदि ने पैदल श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
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