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पति ने मोबाइल नहीं दिलाया तो पत्नी ने दी जान
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सुरियावां। थानाक्षेत्र के बीसापुर गांव में मोबाइल की मांग पूरी नहीं होने से नाराज पत्नी ने बृहस्पतिवार रात विषाक्त पदार्थ खाकर जान दे दी। इससे घर में कोहराम मच गया। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
बीसापुर गांव निवासी किरन देवी (30) पत्नी कमलेश कुमार गौतम की बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे तबीयत खराब हो गई। परिवार वाले उसे सुरियावां में निजी अस्पताल लेकर गए। वहां चिकित्सकों के पूछने पर किरन ने सल्फास खाने की पुष्टि की। वहां से रेफर होने के बाद परिवार वाले भदोही के निजी अस्पताल लेकर गए। वहां भी हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने बीएचयू रेफर किया। वाराणसी जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। ससुराल वालों ने मायके वालों को सूचना दी। पति कमलेश ने बताया कि दो दिन पहले वह रामनगर जौनपुर अपने मायके से लौटी थी। उसी दिन से वह नया मोबाइल खरीदने की जिद करने लगी। कमलेश ने बताया कि पैसा आने के बाद मोबाइल खरीदने का उसने आश्वासन दिया, लेकिन वह जिद पर अड़ी रही। उसने बताया कि मोबाइल फोन लेने की जिद के चलते ही उसने विषाक्त पदार्थ का ेवन कर लिया। किरन के दो बच्चे हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मायके पक्ष को भी सूचित कर दिया गया है। समाचार भेजे जाने तक मायके पक्ष के लोग नहीं पहुंच पाए थे।
बीसापुर गांव निवासी किरन देवी (30) पत्नी कमलेश कुमार गौतम की बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे तबीयत खराब हो गई। परिवार वाले उसे सुरियावां में निजी अस्पताल लेकर गए। वहां चिकित्सकों के पूछने पर किरन ने सल्फास खाने की पुष्टि की। वहां से रेफर होने के बाद परिवार वाले भदोही के निजी अस्पताल लेकर गए। वहां भी हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने बीएचयू रेफर किया। वाराणसी जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। ससुराल वालों ने मायके वालों को सूचना दी। पति कमलेश ने बताया कि दो दिन पहले वह रामनगर जौनपुर अपने मायके से लौटी थी। उसी दिन से वह नया मोबाइल खरीदने की जिद करने लगी। कमलेश ने बताया कि पैसा आने के बाद मोबाइल खरीदने का उसने आश्वासन दिया, लेकिन वह जिद पर अड़ी रही। उसने बताया कि मोबाइल फोन लेने की जिद के चलते ही उसने विषाक्त पदार्थ का ेवन कर लिया। किरन के दो बच्चे हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मायके पक्ष को भी सूचित कर दिया गया है। समाचार भेजे जाने तक मायके पक्ष के लोग नहीं पहुंच पाए थे।
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