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Bhadohi News: इस्लामी नए साल के चांद की तस्दीक, यौमे आशूरा 17 को
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भदोही। इस्लामी कैलेंडर के नए साल के चांद की तस्दीक रविवार की शाम होने के साथ ही इस्लामी नया साल शुरू हो गया। रविवार को दिन भर आसमान में बादल की लुका छिपी के चलते बमुश्किल चांद की तस्दीक हो सकी। नगर के मर्यादपट्टी स्थित मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल हुसैन अशर्फी ने चांद की तस्दीक करते हुए बताया कि मोहर्रम के दसवें तारीख यानी यौमे आशूरा 17 जुलाई को मनाया जाएगा। चांद होने के बाद से एक दूसरे को बधाई देने का दौर जारी है।
मौलाना अशर्फी ने कहा कि पहला महीना इस्लामी इतिहास के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। यह हमें इस्लाम के उसूलों की याद ताजा कराता है। एक तो यह वर्ष की शुरूआत भी है और दसवीं तारीख को कर्बला में शहीदों की याद ताजा हो जाती है। ये वे शहीद हैं, जो इस्लाम के ऊसूलों से पीछे नहीं हटे, बल्कि शहीद होना पसंद किया। कर्बला के शहीदों से हर मुसलमान को सीख लेनी चाहिए। यह मुसलमानों को सच्ची राह दिखाता है। बताया कि दसवीं यौमे आशूरा के दिन ही हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। जिनकी याद में पूरी दुनियां में मोहर्रम मनाया जाता है। मौलाना ने कहा कि मोहर्रम पर बैंड बाजा न बजाकर इबादत में वक्त गुजारना चाहिए। दसवीं के दिन रोजा रखना, गरीबों को भोजन कराना ही हजरत इमाम हुसैन को सच्ची श्रद्धांजली है। कहा कि यौमे आशूरा तक सबको चाहिए कि एक दूसरे को कर्बला की बातें बताएं। बताया कि मुबारकपुर, किछौछे, बनारस आदि से चांद की तस्दीक कर ली गई है। उधर चांद होने के साथ ही अकीदतमंदों ने अपने अपने मोहल्ले के इमाम चौकों की साफ सफाई की और अगरबत्ती सुलगाया।
ताजिया चौक पर कब्जे की शिकायत पर पहुंचे एसडीएम सीओ
भदोही। नगर के मोहल्ला जमुंद में भाईयों के आपसी विवाद में एक पक्ष ने इमाम चौक पर कब्जा कर लिया। ताजियादारों की शिकायत पर सोमवार की शाम एसडीएम भान सिंह और सीओ अजय कुमार चौहान ने पहुंच कर मौका मुआयना किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। चौक पर कब्जा किए पक्ष ने उस पर न्यायालय का स्टे दिखाया तो सीओ ने कहा कि स्टे दूसरे पक्ष के लिए हो सकता है। मोहर्रम के इमाम चौक पर ताजिया रखने से नहीं रोका जा सकता। ताजियादारों ने रविवार को ही शिकायत की थी तब कोतवाली प्रभारी मौके पर गए थे और विवाद न करने के निर्देश कर वापस आए थे। इसी क्रम में मोहर्रम त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार को सीओ और एसडीएम भी पहुंचे और सभी पक्षों को सुना। सीओ ने बताया कि कब्जा किए पक्ष ने स्थगन आदेश दिखाया लेकिन वह दूसरे पक्ष पर लागू तो हो सकता है लेकिन ऐसा नहीं है कि वहां परंपरागत रूप से रखे जा रहे ताजिया को भी रोक दें। सीओ और एसडीएम ने कहा कि परंपरा के अनुसार वहां ताजिया रखी जाएगी और उसे कोई रोक नहीं सकता। इस पर लोग संतुष्ट होकर चले गए।
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मौलाना अशर्फी ने कहा कि पहला महीना इस्लामी इतिहास के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। यह हमें इस्लाम के उसूलों की याद ताजा कराता है। एक तो यह वर्ष की शुरूआत भी है और दसवीं तारीख को कर्बला में शहीदों की याद ताजा हो जाती है। ये वे शहीद हैं, जो इस्लाम के ऊसूलों से पीछे नहीं हटे, बल्कि शहीद होना पसंद किया। कर्बला के शहीदों से हर मुसलमान को सीख लेनी चाहिए। यह मुसलमानों को सच्ची राह दिखाता है। बताया कि दसवीं यौमे आशूरा के दिन ही हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। जिनकी याद में पूरी दुनियां में मोहर्रम मनाया जाता है। मौलाना ने कहा कि मोहर्रम पर बैंड बाजा न बजाकर इबादत में वक्त गुजारना चाहिए। दसवीं के दिन रोजा रखना, गरीबों को भोजन कराना ही हजरत इमाम हुसैन को सच्ची श्रद्धांजली है। कहा कि यौमे आशूरा तक सबको चाहिए कि एक दूसरे को कर्बला की बातें बताएं। बताया कि मुबारकपुर, किछौछे, बनारस आदि से चांद की तस्दीक कर ली गई है। उधर चांद होने के साथ ही अकीदतमंदों ने अपने अपने मोहल्ले के इमाम चौकों की साफ सफाई की और अगरबत्ती सुलगाया।
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ताजिया चौक पर कब्जे की शिकायत पर पहुंचे एसडीएम सीओ
भदोही। नगर के मोहल्ला जमुंद में भाईयों के आपसी विवाद में एक पक्ष ने इमाम चौक पर कब्जा कर लिया। ताजियादारों की शिकायत पर सोमवार की शाम एसडीएम भान सिंह और सीओ अजय कुमार चौहान ने पहुंच कर मौका मुआयना किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। चौक पर कब्जा किए पक्ष ने उस पर न्यायालय का स्टे दिखाया तो सीओ ने कहा कि स्टे दूसरे पक्ष के लिए हो सकता है। मोहर्रम के इमाम चौक पर ताजिया रखने से नहीं रोका जा सकता। ताजियादारों ने रविवार को ही शिकायत की थी तब कोतवाली प्रभारी मौके पर गए थे और विवाद न करने के निर्देश कर वापस आए थे। इसी क्रम में मोहर्रम त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार को सीओ और एसडीएम भी पहुंचे और सभी पक्षों को सुना। सीओ ने बताया कि कब्जा किए पक्ष ने स्थगन आदेश दिखाया लेकिन वह दूसरे पक्ष पर लागू तो हो सकता है लेकिन ऐसा नहीं है कि वहां परंपरागत रूप से रखे जा रहे ताजिया को भी रोक दें। सीओ और एसडीएम ने कहा कि परंपरा के अनुसार वहां ताजिया रखी जाएगी और उसे कोई रोक नहीं सकता। इस पर लोग संतुष्ट होकर चले गए।
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