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कंपनी मालिक ने भगाया फिर घर के लिए 400 किमी पैदल चला
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ज्ञानपुर/लालानगर। कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन की मार से परेशान प्रवासियों की मुश्किलें घर आने पर भी कम नहीं हो रहीं। तमाम मुश्किलें सहकर 1500 किमी दूर से घर आने पर अब रोजी-रोजगार की चिंता सताने लगी। जो पैसे रखे थे वह लॉकडाउन में ही खर्च हो गए। ऐसे में काम-धाम न मिला तो उनकी परेशानी बढ़ जाएगी।
सोमवार शाम को घर पहुंचे गोपीगंज के रामपुर घाट निवासी दिनेश सरोज एक साल पूर्व रोजी-रोटी के जुगाड़ में महाराष्ट्र के पुणे गए। वहां एक कंपनी में काम कर परिवार का जीवकोपार्जन कर रहे थे। कोरोना वायरस के कारण 24 मार्च से शुरू लॉकडाउन के कारण कहीं निकल नहीं सका। डेढ़ महीने तक कंपनी ने अपने कमरे में रहने दिया, लेकिन 15 दिन पूर्व कमरा खाली करा लिया गया।
जेब में पैसे न होने से 400 किमी तक पैदल सफर किया। उसके बाद दूसरे से ऊधार मांगकर ट्रक चालक को चार हजार दिया। जिससे सोमवार को घर आ सका। जेब में पैसे न होने के कारण अब परिवार को कैसे चलाएं यह चिंता सताने लगी है। कोरोना वायरस आगे कब तक रहेगा यह स्पष्ट नहीं है।
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अमिलौर गांव के ही सोनू सरोज भी उसी कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण वह भी कंपनी की ज्यादती के शिकार हुए। कहा कि सरकार जल्द ही प्रवासियों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाएगी तो स्थिति काफी विकट हो जाएगी।
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सोमवार शाम को घर पहुंचे गोपीगंज के रामपुर घाट निवासी दिनेश सरोज एक साल पूर्व रोजी-रोटी के जुगाड़ में महाराष्ट्र के पुणे गए। वहां एक कंपनी में काम कर परिवार का जीवकोपार्जन कर रहे थे। कोरोना वायरस के कारण 24 मार्च से शुरू लॉकडाउन के कारण कहीं निकल नहीं सका। डेढ़ महीने तक कंपनी ने अपने कमरे में रहने दिया, लेकिन 15 दिन पूर्व कमरा खाली करा लिया गया।
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जेब में पैसे न होने से 400 किमी तक पैदल सफर किया। उसके बाद दूसरे से ऊधार मांगकर ट्रक चालक को चार हजार दिया। जिससे सोमवार को घर आ सका। जेब में पैसे न होने के कारण अब परिवार को कैसे चलाएं यह चिंता सताने लगी है। कोरोना वायरस आगे कब तक रहेगा यह स्पष्ट नहीं है।
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अमिलौर गांव के ही सोनू सरोज भी उसी कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण वह भी कंपनी की ज्यादती के शिकार हुए। कहा कि सरकार जल्द ही प्रवासियों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाएगी तो स्थिति काफी विकट हो जाएगी।