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नागरिका संशोधन विधेयक पर बोला प्रबुद्ध वर्ग

Thu, 12 Dec 2019 11:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2019 11:27 PM IST
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Citizenship Amendment Bill
ज्ञानपुर। तीन पड़ोसी देशों के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने संबंधी नागरिकता संशोधन विधेयक के कानूनी और कूटनीतिक निहितार्थ क्या होंगे, यह तो समय बताएगा, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से यह प्रावधान देश के हित में माना जा रहा है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला से बातचीत के दौरान प्रबुद्ध वर्ग ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। एक तबका जहां मानता है कि यह विधेयक लंबे समय से अस्तित्व के लिए लड़ रहे शरणार्थियों के लिए वरदान साबित होगा तो दूसरी ओर इसे आदिवासी, गरीब, भूमिहीन, अनपढ़ों के लिए फजीहत का सबब भी माना जा रहा है।
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भदोही जिला निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके केशव कृपाल पांडेय कहते हैं कि विधेयक की सार्थकता को अनुभव करना है तो उनके दिलों में झांक कर देखिए जो लंबे समय से नागरिकता के लिए जूझ रहे थे। रामचरित मानस की चौपाई ‘आवहु शरण तजहुं नहिं काहू...’ का उल्लेख करते हुए वह कहते हैं कि हमारी संस्कृति रही है कि शरण में आए हुए व्यक्ति को हम पूरा सम्मान देते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ सकता है कि फिर मुस्लिमों को क्यों नहीं? इस पर वह साफ करते हैं कि पहली बात तो यह कि मुस्लिम कहीं भी सताए नहीं जा रहे हैं। और जिन कारणों से लोग शरणार्थी बन रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। इस विधेयक से हमारे देश के मुस्लिमों के लिए कोई समस्या नहीं है। भिखारीरामपुर गांव निवासी फिल्म लेखक और साहित्यकार अखिलेश कुमार मिश्र बोधिसत्व कहते हैं कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिन्हें किसी तरह से स्पष्ट नहीं किया जा सकता। देश के मुसलमानों का अधिकतम एक हजार साल पुराना इतिहास मिलता है। अगर इससे पूर्व का नागरिकता संबंधी प्रमाण मांगा जाएगा तो कोई कैसे दे पाएगा। खसरा-खतौनी के आधार पर नागरिकता सिद्ध नहीं की जा सकती। अगर ऐसा करने का प्रयास किया जाएगा तो अराजकता बढ़ेगी। विधेयक के आलोक में आने वाला समय जंगल-पहाड़ में रहने वाले आदिवासियों, भूमिहीनों और अनपढ़ मजदूर तबके के लोगों के लिए फजीहत भरा हो सकता है। कांग्रेस नेता सत्येंद्र प्रकाश तिवारी ने कहा कि विधेयक अधूरा है। इसमें सभी अल्पसंख्यकों को क्यों नहीं शामिल किया गया। केवल तीन देशों के गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को ही क्यों शामिल किया गया। यह संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है। अधिवक्ता रमाशंकर तिवारी ने कहा कि विधेयक देशहित में है। इससे बड़ी संख्या में शरणार्थियों को फायदा पहुंचेगा।
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