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तीन रेलवे स्टेशनों पर सजेगी कालीन की स्टाल
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विश्व के विभिन्न देशों में मखमली कालीन का निर्यात करने वाले भदोही जिले के कालीन को और बुलंदी देने के लिए रेलवे ने अपने तीन स्टेशनों पर कालीन का स्टॉल लगाने का निर्णय लिया है। एक स्टेशन एक उत्पाद के तहत वाराणसी रेल खंड के माधोसिंह-रामबाग रूट पर ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह और कटका स्टेशन का चयन किया गया। स्टॉल लगाने की कवायद भी शुरू कर दी गई है।
रेलवे से जुड़े अधिकारियों की मानें तो पूर्वोत्तर रेलवे अपने 101 रेलवे स्टेशनों में से तीन स्टेशन पर एक स्टेशन-एक उत्पाद योजनांतर्गत कालीन का स्टाल सजाने के लिए आवेदन मांगा है। ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह और कटका स्टेशन का चयन करके स्टॉल लगाने की तैयारी है। इसी रूट पर कछवां, दारागंज, हंडिया खास स्टेशन पर मिट्टी के बर्तन, रामबाग जंक्शन पर जूट शिल्पकला, निगतपुर, भीटी स्टेशन पर पड़किया मिठाई के लिए चयनित हुए हैं। जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी डिविजन अशोक कुमार ने बताया कि एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना का लाभ पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी छोर से पूर्वी छोर की यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलेगा। उत्पादों की बिक्री एक स्टेशन पर 15 दिन के लिए मान्य होगी। रेल प्रशासन आवेदकों से एक हजार रुपये शुल्क लेकर टोकन जारी करेगा। योजना में विकास आयुक्त हस्तशिल्प, हस्त करघा में पंजीकरण, केंद्र/प्रदेश सरकार से जारी श्रमिक आईडी कार्ड होने चाहिए। स्वयं सहायता समूह, कमजोर वर्ग को वरीयता दी जाएगी। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर अलग-अलग उत्पाद के स्टाल लगवाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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रेलवे से जुड़े अधिकारियों की मानें तो पूर्वोत्तर रेलवे अपने 101 रेलवे स्टेशनों में से तीन स्टेशन पर एक स्टेशन-एक उत्पाद योजनांतर्गत कालीन का स्टाल सजाने के लिए आवेदन मांगा है। ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह और कटका स्टेशन का चयन करके स्टॉल लगाने की तैयारी है। इसी रूट पर कछवां, दारागंज, हंडिया खास स्टेशन पर मिट्टी के बर्तन, रामबाग जंक्शन पर जूट शिल्पकला, निगतपुर, भीटी स्टेशन पर पड़किया मिठाई के लिए चयनित हुए हैं। जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी डिविजन अशोक कुमार ने बताया कि एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना का लाभ पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी छोर से पूर्वी छोर की यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलेगा। उत्पादों की बिक्री एक स्टेशन पर 15 दिन के लिए मान्य होगी। रेल प्रशासन आवेदकों से एक हजार रुपये शुल्क लेकर टोकन जारी करेगा। योजना में विकास आयुक्त हस्तशिल्प, हस्त करघा में पंजीकरण, केंद्र/प्रदेश सरकार से जारी श्रमिक आईडी कार्ड होने चाहिए। स्वयं सहायता समूह, कमजोर वर्ग को वरीयता दी जाएगी। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर अलग-अलग उत्पाद के स्टाल लगवाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
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