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कालीन निर्यातकों के 150 करोड़ दांव पर

Tue, 03 Mar 2015 01:48 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला Updated Tue, 03 Mar 2015 01:48 AM IST
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Carpet Exporters 150 million at stake
टर्की सरकार द्वारा भारतीय कालीनों पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत तक बढ़ा
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दिए जाने से कालीन निर्यातकों के लगभग 150 करोड़ रुपये दांव पर लग गए हैं।

यदि पूर्व अनुबंधों को पुराने दर से पूरा करने का अवसर नहीं मिला तो भारतीय निर्यातकों का भारी नुकसान होगा। इस नुकसान से भारी राशि बचाने के लिए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) और अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) दोनो लग गए हैं।

 27 पुरवरी नई दिल्ली स्थित टर्की दूतावास में टर्की के राजदूत बराक एकापर से मुलाकात के बाद सीईपीसी ने कालीन निर्यातकों से पूर्व अनुबंधों और आर्डर सूची का आंकड़ा मांगा है।

उधर, एकमा के मानद सचिव तनवीर हुसैन ने विधाक जाहिद बेग के माध्यम से इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लिखे पत्र में उनसे प्रधानमंत्री द्वारा हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

मालूम हो कि  गत 18 फरवरी को टर्की सरकार ने भारत से टर्की जाने वाले कालीनों पर कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 60 प्रतिशत कर दिया।

इससे 100 रुपये का जो माल अब तक 110 में निर्यात होता था वह अब 160 रुपये हो जाएगा। टर्की सरकार के इस निर्णय से भदोही कालीन परिक्षेत्र में खलबली मच गई।


इस निर्णय से भविष्य में भारत-टर्की व्यापार पर असर तो पड़ेगा ही लेकिन कालीन निर्यातक  वर्तमान आर्डरों को लेकर चिंतित हो उठे हैं। एकमा के अध्यक्ष विनय कपूर ने बताया कि टर्की लगभग 1050 करोड़ रुपये का बाजार है। और वर्तमान में 150 करोड़ रुपये के आर्डर उत्पादन अधीन है।

टर्की सरकार के नए निर्णय से न केवल निर्यातकों को नुकसान होगा बल्कि मजदूरों की भी रोजी रोटी पर असर पडे़गा।
एकमा के मानद सचिव, तनवीर हुसैन अंसारी ने कहा कि सीईपीसी ने पिछले दिनों टर्किश राजदूत से मिलकर पुराने आर्डरों को पूरा करने हेतु नई ड्यूटी दरों में राहत मांगी थी।

 इस बावत सीईपीसी ने टर्की से व्यवसाय करने वाले निर्यातकों से उत्पादनाधीन आर्डर की जानकारी मांगी है। जिसको लेकर टर्की राजदूत के माध्यम से विशेष आग्रह भेजा जाएगा।

ताकि टर्की सरकार ने जो इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है उससे कालीन निर्यात राहत ले सकें।
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