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ूड़े के ढेर में दब रही कालीन नगरी
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ज्ञानपुर। आजादी के सात दशक बाद भी कालीन नगरी में कूड़ा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। एक जगह से उठाओ और दूसरी जगह फेंको की परंपरा पर आज भी अमल किया जा रहा है। यही कारण है कि जगह जगह डंप कूड़े न सिर्फ वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, बल्कि लचर सफाई व्यवस्था की दास्तान भी बयां करते देखे जा रहे हैं। औसतन प्रतिदिन 90 से 100 टन निकल रहे कूड़े से कालीन नगरी दबती जा रही है।
जनपद की दो नगर पालिकाओं भदोही, गोपीगंज और पांच नगर पंचायतों ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार में साफ सफाई की व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। यही कारण है कि शहर में कई स्थानों पर कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं। कूड़ा डंप वाले क्षेत्रों में इसके चलते गंदगी का साम्राज्य कायम है। वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है। नजीर के तौर भदोही नगर पालिका परिषद की बात करें तो नगर की एक लाख से अधिक की आबादी के बीच 25 वार्डों की साफ सफाई व्यवस्था के लिए पालिका के पास 162 सफाईकर्मियों की फौज है। कूड़ा उठाने के लिए लगभग डेढ़ दर्जन छोटी बड़ी गाड़ियां हैं। बावजूद इसके नगर के विभिन्न मोहल्लों, गलियों, सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। आलम यह है कि कुछ वार्ड व मोहल्ले तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एकाध बार सफाई टीम नजर आती है जबकि कुछ मोहल्लों में वर्षों से लोग दर्शन को तरस रहे हैं। यही कारण है कि उपेक्षाग्रस्त मोहल्लों में गंदगी पसरी रहती है। कमोबेश यही हाल गोपीगंज, घोसिया समेत अन्य नगरों की है। सुबह कूड़ा उठाने के बाद चिन्हित स्थानों पर गिरा दिया जाता है।
लाखों के डस्टबीन भी बन गए शोपीस
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन मुहिम के तहत नगरों में लाखों की लागत से डस्टबीन खरीदा गया है लेकिन वह भी शोपीस बनकर रह गया है। ज्ञानपुर के जिला पंचायत कार्यालय के समीप हो या अन्य सार्वजनिक स्थलों के समीप। पखवारे से लेकर महीने तक उक्त डस्टबीन से कूड़े नहीं हटते। जिससे उससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है।
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इन
एक जगह से उठाओ दूसरी जगह फेंको
ज्ञ्
पुर। कूड़ा निस्तारण की स्थाई व्यवस्था के अभाव में एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर फेंकने की विवशता है। हालांकि घनी बस्ती होने के कारण नगरों के पास इसका विकल्प भी नहीं है। यही कारण है कि जहां भी खाली जमीन मिली वहां उड़ेल दिया जाता है। इसके चलते आसपास के क्षेत्रों का वातावरण प्रदूषित हो जाता है।
इन
प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े की स्थिति
नगर निकलने वाला कूड़ा
भदोही 40 एमटी
गोपीगंज 25 एमटी
ज्ञानपुर 10 एमटी
सुरियावां 08 एमटी
नई बाजार 12 एमटी
खमरिया 14 एमटी
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जनपद की दो नगर पालिकाओं भदोही, गोपीगंज और पांच नगर पंचायतों ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार में साफ सफाई की व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। यही कारण है कि शहर में कई स्थानों पर कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं। कूड़ा डंप वाले क्षेत्रों में इसके चलते गंदगी का साम्राज्य कायम है। वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है। नजीर के तौर भदोही नगर पालिका परिषद की बात करें तो नगर की एक लाख से अधिक की आबादी के बीच 25 वार्डों की साफ सफाई व्यवस्था के लिए पालिका के पास 162 सफाईकर्मियों की फौज है। कूड़ा उठाने के लिए लगभग डेढ़ दर्जन छोटी बड़ी गाड़ियां हैं। बावजूद इसके नगर के विभिन्न मोहल्लों, गलियों, सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। आलम यह है कि कुछ वार्ड व मोहल्ले तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एकाध बार सफाई टीम नजर आती है जबकि कुछ मोहल्लों में वर्षों से लोग दर्शन को तरस रहे हैं। यही कारण है कि उपेक्षाग्रस्त मोहल्लों में गंदगी पसरी रहती है। कमोबेश यही हाल गोपीगंज, घोसिया समेत अन्य नगरों की है। सुबह कूड़ा उठाने के बाद चिन्हित स्थानों पर गिरा दिया जाता है।
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लाखों के डस्टबीन भी बन गए शोपीस
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन मुहिम के तहत नगरों में लाखों की लागत से डस्टबीन खरीदा गया है लेकिन वह भी शोपीस बनकर रह गया है। ज्ञानपुर के जिला पंचायत कार्यालय के समीप हो या अन्य सार्वजनिक स्थलों के समीप। पखवारे से लेकर महीने तक उक्त डस्टबीन से कूड़े नहीं हटते। जिससे उससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है।
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एक जगह से उठाओ दूसरी जगह फेंको
ज्ञ्
पुर। कूड़ा निस्तारण की स्थाई व्यवस्था के अभाव में एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर फेंकने की विवशता है। हालांकि घनी बस्ती होने के कारण नगरों के पास इसका विकल्प भी नहीं है। यही कारण है कि जहां भी खाली जमीन मिली वहां उड़ेल दिया जाता है। इसके चलते आसपास के क्षेत्रों का वातावरण प्रदूषित हो जाता है।
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प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े की स्थिति
नगर निकलने वाला कूड़ा
भदोही 40 एमटी
गोपीगंज 25 एमटी
ज्ञानपुर 10 एमटी
सुरियावां 08 एमटी
नई बाजार 12 एमटी
खमरिया 14 एमटी