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कूड़े के ढेर में दब रही कालीन नगरी
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इधर-उधर फेंककर या जलाकर हो रहा कूड़े का निस्तारण
कूड़ा निस्तारण व्यवस्था से वंचित है कालीन नगरी
फोटो: 11,12
जिले के सात नगरों से हर रोज निकल रहा 100 एमटी कूड़ा
कई नगरों में कूड़ा जलाने से हवा में फैलती है जहरीली गैस
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। आजादी के सात दशक बाद भी कालीन नगरी में कूड़ा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। एक जगह से उठाओ और दूसरी जगह फेंको की परंपरा पर आज भी कायम है। यही कारण है कि जगह- जगह डंप कूड़े न सिर्फ वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। औसतन प्रतिदिन 90 से 100 एमटी निकल रहा कूड़ा कालीन नगरी के लिए समस्या बन गया है।
जिले की दो नगर पालिकाओं भदोही, गोपीगंज और पांच नगर पंचायतों ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार में साफ सफाई की व्यवस्था रामभरोसे है। यही कारण है कि शहर में कई स्थानों पर कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। कूड़ा डंप वाले क्षेत्रों में इसके चलते वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है। नजीर के तौर भदोही नगर पालिका परिषद की बात करें तो नगर की एक लाख से अधिक की आबादी के बीच 25 वार्डों की साफ सफाई व्यवस्था के लिए पालिका के पास 162 सफाई कर्मियों की फौज है। कूड़ा उठाने के लिए लगभग डेढ़ दर्जन छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं। बावजूद इसके नगर के विभिन्न मोहल्लों, गलियों, सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। आलम यह है कि कुछ वार्ड और मोहल्ले तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एकाध बार सफाई टीम नजर आती है जबकि कुछ मोहल्लों में वर्षों से लोग उनके दर्शन को तरस रहे हैं। कमोबेश यही हाल गोपीगंज, घोसिया, ज्ञानपुर समेत अन्य नगरों की है। सुबह कूड़ा उठाने के बाद चिह्नित स्थानों पर गिरा दिया जाता है। भदोही, खमरिया, घोसिया में अक्सर कूड़ा जलाया जाता है, जिससे निकलने वाली गैस काफी जहरीली होती है। पर्यावरणविद् डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि कूड़ा जलने से अमोनिया गैस निकलती है, जो फेफड़े के लिए नुकसानदायक होती है।
इनसेट
लाखों रुपये के डस्टबिन बन गए शोपीस
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन मुहिम के तहत नगरों में लाखों की लागत से डस्टबिन खरीदा गया है, लेकिन वह भी शोपीस बनकर रह गया है। ज्ञानपुर के जिला पंचायत कार्यालय के समीप हो या अन्य सार्वजनिक स्थलों के समीप। पखवारे भर तक डस्टबिन से कूड़े नहीं हटते। इससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है।
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इनसेट
नगरों से हर रोज निकलने वाला कूड़ा
भदोही 40 एमटी
गोपीगंज 25 एमटी
ज्ञानपुर 10 एमटी
सुरियावां 08 एमटी
नई बाजार 12 एमटी
खमरिया 14 एमटी
----------
इनसेट
कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए बन रहा डीपीआर
ज्ञानपुर। भदोही नगर में कूड़ा निस्तारण के लिए 10 एकड़ भूमि पिपरिस में मिली है। राजस्व विभाग ने पालिका को जमीन दे दी है। ईओ भदोही जी लाल ने कहा कि कार्यदायी एजेंसी सीएंडडीएस निर्माण का प्रस्ताव बना रही है। करीब 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बन रहा है। अभी कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था शहर में नहीं है, इसके चलते कूड़ा इधर-उधर बिखरा पड़ा रहता है।
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कूड़ा निस्तारण व्यवस्था से वंचित है कालीन नगरी
फोटो: 11,12
जिले के सात नगरों से हर रोज निकल रहा 100 एमटी कूड़ा
कई नगरों में कूड़ा जलाने से हवा में फैलती है जहरीली गैस
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। आजादी के सात दशक बाद भी कालीन नगरी में कूड़ा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। एक जगह से उठाओ और दूसरी जगह फेंको की परंपरा पर आज भी कायम है। यही कारण है कि जगह- जगह डंप कूड़े न सिर्फ वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। औसतन प्रतिदिन 90 से 100 एमटी निकल रहा कूड़ा कालीन नगरी के लिए समस्या बन गया है।
जिले की दो नगर पालिकाओं भदोही, गोपीगंज और पांच नगर पंचायतों ज्ञानपुर, घोसिया, खमरिया, सुरियावां, नई बाजार में साफ सफाई की व्यवस्था रामभरोसे है। यही कारण है कि शहर में कई स्थानों पर कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। कूड़ा डंप वाले क्षेत्रों में इसके चलते वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है। नजीर के तौर भदोही नगर पालिका परिषद की बात करें तो नगर की एक लाख से अधिक की आबादी के बीच 25 वार्डों की साफ सफाई व्यवस्था के लिए पालिका के पास 162 सफाई कर्मियों की फौज है। कूड़ा उठाने के लिए लगभग डेढ़ दर्जन छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं। बावजूद इसके नगर के विभिन्न मोहल्लों, गलियों, सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा रहता है। आलम यह है कि कुछ वार्ड और मोहल्ले तो ऐसे हैं जहां सप्ताह में एकाध बार सफाई टीम नजर आती है जबकि कुछ मोहल्लों में वर्षों से लोग उनके दर्शन को तरस रहे हैं। कमोबेश यही हाल गोपीगंज, घोसिया, ज्ञानपुर समेत अन्य नगरों की है। सुबह कूड़ा उठाने के बाद चिह्नित स्थानों पर गिरा दिया जाता है। भदोही, खमरिया, घोसिया में अक्सर कूड़ा जलाया जाता है, जिससे निकलने वाली गैस काफी जहरीली होती है। पर्यावरणविद् डॉ. कमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि कूड़ा जलने से अमोनिया गैस निकलती है, जो फेफड़े के लिए नुकसानदायक होती है।
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लाखों रुपये के डस्टबिन बन गए शोपीस
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन मुहिम के तहत नगरों में लाखों की लागत से डस्टबिन खरीदा गया है, लेकिन वह भी शोपीस बनकर रह गया है। ज्ञानपुर के जिला पंचायत कार्यालय के समीप हो या अन्य सार्वजनिक स्थलों के समीप। पखवारे भर तक डस्टबिन से कूड़े नहीं हटते। इससे उठने वाली दुर्गंध से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है।
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नगरों से हर रोज निकलने वाला कूड़ा
भदोही 40 एमटी
गोपीगंज 25 एमटी
ज्ञानपुर 10 एमटी
सुरियावां 08 एमटी
नई बाजार 12 एमटी
खमरिया 14 एमटी
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इनसेट
कूड़ा निस्तारण केंद्र के लिए बन रहा डीपीआर
ज्ञानपुर। भदोही नगर में कूड़ा निस्तारण के लिए 10 एकड़ भूमि पिपरिस में मिली है। राजस्व विभाग ने पालिका को जमीन दे दी है। ईओ भदोही जी लाल ने कहा कि कार्यदायी एजेंसी सीएंडडीएस निर्माण का प्रस्ताव बना रही है। करीब 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बन रहा है। अभी कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था शहर में नहीं है, इसके चलते कूड़ा इधर-उधर बिखरा पड़ा रहता है।