ज्ञानपुर। कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कारागार निदेशालय ने पहल की है। पांच से 15 जुलाई तक उद्योग एवं उद्यम निदेशालय ने 10 दिवसीय प्रशिक्षण देकर 25 बंदियों को कालीन बुनाई में दक्षता का प्रमाणपत्र दिया है। अब कौशल विकास योजनांतर्गत तीन माह के प्रशिक्षण में 20 और बंदी तकनीकी शिक्षा में निपुण होकर सरकारी, अर्ध सरकारी प्रतिष्ठानों से जुड़कर जीवन को आत्मनिर्भर बनाएंगे। ज्ञानपुर के जेलर राजेश वर्मा ने बताया कि बंदियों को हाईटेक बनाने के क्रम में तकनीकी प्रशिक्षण को बल दिया जा रहा है। प्रशिक्षक मोहम्मद इरफान ने कहा कि प्रदेश सरकार बढ़ते अपराधों में बंदियों की बढ़ रही संख्या को लेकर गंभीर है। जब तक जागरूकता नहीं रहेगी तब तक आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों की मानसिकता को नहीं बदला जा सकता। तकनीकी प्रशिक्षण और बंदियों को शिक्षित बनाकर ही उनमें बदलाव लाया जा सकेगा। आधुनिक लैब में प्रथम दिन चयनित बंदियों ने कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी लेना शुरू कर दिया है। प्रशिक्षण का समय सुबह नौ से सायं पांच बजे तक निर्धारित है। मानीटरिंग टीम के संजय कुमार ने प्रशिक्षु उमाशंकर, पंकज यादव, धर्मेंद्र, अमित सिंह, उमेश चौहान, नूरआलम, आतिफ, पंकज सरोज, विकास मिश्रा, मोहम्मद इसरार, ओमचंद गुप्ता, आशीष गोड़, परम प्रज्ञान, रत्नेश राय, कुलदीप शर्मा, राजन वक्रिम, अख्तर अली, संदीप गुप्ता, शुभम दुबे, रूपेश वर्मा को कंप्यूटर चलाने से लेकर बंद करने की सीख दी।