{"_id":"61730765f7a06550733eabe1","slug":"burning-stubble-in-the-fields-reduces-fossil-erosion-bhadohi-news-vns618714879","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतों में पराली जलाने से घटता है जीवाश्म क्षरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतों में पराली जलाने से घटता है जीवाश्म क्षरण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इन-सी-टू एवं रबी उत्पादकता अंतर्गत जिला स्तरीय कृषक गोष्ठी का शुभारंभ मुख्यअतिथि औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ने शुक्रवार को कृषि भवन घराव में किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाकर उत्पादन, उपकरणों से तकनीकी खेती की जा सकती है।
उप कृषि निदेशक अरविंद सिंह ने बताया कि किसान खेतों में पराली को न जलाकर सड़ा दें। पराली को जलाने के लिए 500 ग्राम यूरिया का उपयोग हर तरह के पराली में सड़ाकर जैविक खाद में बदल सकता है। विशेषज्ञ डा. जीपी चौधरी ने पशुओं में होने वाले रोग, उसके निदान पर जानकारी दी। कहा कि पशुओं में बांझपन का कारण संतुलित आहार न होना, हरे चारे का अभाव है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश बरनवाल ने जलवायु परिवर्तन को भांप कर तकनीकी खेती का लाभ किसान उठा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में स्वचालित मौसम संयंत्र की स्थापना हो चुकी है जिससे हर तरह के मौसम की जानकारी ली जा सकेगी। नैनी-प्रयागराज के वैज्ञानिक डा.शिशिर कुमार रासायनिक खाद, दवाओं का उपयोग, बीज शोधन में ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम कल्चर पर बल दिया। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अरुणेंद्र चौबे ने क्रय केंद्र बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने की मांग की जिस पर अधिकारियों ने सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर रामअकबाल तिवारी, श्यामधर सिंह, अनिल कुमार सिंह, डा.विश्वेंदु द्विवेदी समेत किसान, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उप कृषि निदेशक अरविंद सिंह ने बताया कि किसान खेतों में पराली को न जलाकर सड़ा दें। पराली को जलाने के लिए 500 ग्राम यूरिया का उपयोग हर तरह के पराली में सड़ाकर जैविक खाद में बदल सकता है। विशेषज्ञ डा. जीपी चौधरी ने पशुओं में होने वाले रोग, उसके निदान पर जानकारी दी। कहा कि पशुओं में बांझपन का कारण संतुलित आहार न होना, हरे चारे का अभाव है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश बरनवाल ने जलवायु परिवर्तन को भांप कर तकनीकी खेती का लाभ किसान उठा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में स्वचालित मौसम संयंत्र की स्थापना हो चुकी है जिससे हर तरह के मौसम की जानकारी ली जा सकेगी। नैनी-प्रयागराज के वैज्ञानिक डा.शिशिर कुमार रासायनिक खाद, दवाओं का उपयोग, बीज शोधन में ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम कल्चर पर बल दिया। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अरुणेंद्र चौबे ने क्रय केंद्र बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने की मांग की जिस पर अधिकारियों ने सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर रामअकबाल तिवारी, श्यामधर सिंह, अनिल कुमार सिंह, डा.विश्वेंदु द्विवेदी समेत किसान, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन