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Bhadohi News: बजट का संकट, 346 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम ठप
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के लिए गुजरे तीन महीने से बजट नहीं मिल सका है। इससे 346 ग्राम पंचायतों में काम ठप हो गया है। 85 हजार जॉब कार्डधारकों का 10 करोड़ मजदूरी बकाया है। इससे मजदूरों के सामने घर का खर्च चलाने में दिक्कत आ रही है। वहीं विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। मजदूर रोजाना ग्राम प्रधान और रोजगार सेवकों के घर के चक्कर काट रहे हैं। यहां से सिर्फ उनको आश्वासन मिल रहा है। अगर समय से भुगतान न मिला तो इनकी होली भी फीकी रह जाएगी।
प्रति व्यक्ति आय बढ़े और लोगों की गरीबी दूर हो सके, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार ही सबसे सहज उपाय है। हालांकि शिक्षित व अशिक्षित बेरोजगारों की भीड़ में हर हाथ को काम उपलब्ध कराना समय की चुनौती बनी हुई है। गरीबी उन्मूलन की दिशा में शासन की ओर से तरह-तरह के उपाय भी किए जा रहे हैं। रोजगार व स्वरोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं।
इसी कड़ी में प्रत्येक व्यक्ति को 100 दिन रोजगार की गारंटी देने को लेकर संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लोगों को काम दिया जा रहा है, लेकिन आधे दिसंबर के बाद से बजट न आने से यह काम भी प्रभावित हो गया है। 546 ग्राम पंचायतों में करीब 200 में ही रास्ते, बाउंड्री वॉल, खेल मैदान निर्माण, अंत्येष्टि स्थल, चकरोड बंदी और तालाब खोदाई के साथ-साथ नाली, इंटरलॉकिंग व खड़ंजा कार्य हो रहा है जबकि 346 में काम ठप है। करीब दो-ढाई महीने से मजदूरी न मिलने से जाबकार्डधारक भी काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इससे जरूरी काम अधर में लटके हुए हैं। यही नहीं सक्रिय 85 हजार मजदूरों का 10 करोड़ तक मजदूरी बकाया है।
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वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से अधिक हुआ काम
उपायुक्त मनरेगा राजाराम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 16 लाख नौ हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन 18 लाख से अधिक मानव दिवस का सृजन हो चुका है। उन्होंने बताया कि मनरेगा में अब कई काम जोड़े गए हैं, जिससे पंजीकृत श्रमिकों को काम मिलता है।
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प्रति व्यक्ति आय बढ़े और लोगों की गरीबी दूर हो सके, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार ही सबसे सहज उपाय है। हालांकि शिक्षित व अशिक्षित बेरोजगारों की भीड़ में हर हाथ को काम उपलब्ध कराना समय की चुनौती बनी हुई है। गरीबी उन्मूलन की दिशा में शासन की ओर से तरह-तरह के उपाय भी किए जा रहे हैं। रोजगार व स्वरोजगार के अवसर तलाशे जा रहे हैं।
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इसी कड़ी में प्रत्येक व्यक्ति को 100 दिन रोजगार की गारंटी देने को लेकर संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लोगों को काम दिया जा रहा है, लेकिन आधे दिसंबर के बाद से बजट न आने से यह काम भी प्रभावित हो गया है। 546 ग्राम पंचायतों में करीब 200 में ही रास्ते, बाउंड्री वॉल, खेल मैदान निर्माण, अंत्येष्टि स्थल, चकरोड बंदी और तालाब खोदाई के साथ-साथ नाली, इंटरलॉकिंग व खड़ंजा कार्य हो रहा है जबकि 346 में काम ठप है। करीब दो-ढाई महीने से मजदूरी न मिलने से जाबकार्डधारक भी काम में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इससे जरूरी काम अधर में लटके हुए हैं। यही नहीं सक्रिय 85 हजार मजदूरों का 10 करोड़ तक मजदूरी बकाया है।
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वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से अधिक हुआ काम
उपायुक्त मनरेगा राजाराम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 16 लाख नौ हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन 18 लाख से अधिक मानव दिवस का सृजन हो चुका है। उन्होंने बताया कि मनरेगा में अब कई काम जोड़े गए हैं, जिससे पंजीकृत श्रमिकों को काम मिलता है।