भदोही पुलिस का एक्शन: सचिव की आईडी से बनाए 250 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, पंचायत सहायक समेत तीन गिरफ्तार
भदोही जिले की पुलिस ने कूटरचित तरीके से प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। सचिव की आईडी से 250 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पुलिस ने पंचायत सहायक समेत तीन को गिरफ्तार किया।
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भदोही जिले की सुरियावां पुलिस ने सोमवार को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का खुलासा करते हुए पंचायत सहायक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन एंड्रायड मोबाइल बरामद किए। पूछताछ के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया।
पुलिस लाइन सभागार में एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि कुछ महीने पहले फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने के मामले में सुरियावां थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विवेचना के दौरान मनापुर गांव के पंचायत सहायक समेत दो आधार सुधार केंद्र संचालकों की संलिप्तता सामने आई।
जांच में पता चला कि ग्राम पंचायत और ग्राम विकास अधिकारियों को धोखे में रखकर उनकी यूजर आईडी और ईमेल का दुरुपयोग किया गया। सीआरएस पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज और सादे कागज अपलोड कर कूटरचित तरीके से जन्म प्रमाणपत्र तैयार किए जा रहे थे।
एएसपी शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने सोमवार को मनापुर के पंचायत सहायक कृष्ण कुमार प्रजापति निवासी मनापुर, बिंद प्रदूषण केंद्र सुरियावां के संचालक प्रदीप कुमार निवासी गहरपुर, बरसठी, जौनपुर और आधार सुधार केंद्र मोढ़ पुरानी बाजार के संचालक कमलकांत यादव निवासी चककिशुनदास को बहुता मार्ग से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार तीनों के बैंक खातों में ऑनलाइन अवैध लेनदेन भी मिला है। पूछताछ में आरोपियों ने सचिव की आईडी का इस्तेमाल कर 200 से 250 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की बात स्वीकार की है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में मुख्य आरोपी कृष्ण कुमार प्रजापति ने बताया कि अधिकारियों की कंप्यूटर संबंधी कम जानकारी का फायदा उठाकर वह ओटीपी प्राप्त कर उनकी ईमेल आईडी और पोर्टल पर लॉगिन करता था। प्रदीप कुमार और कमल यादव के केंद्रों पर प्रमाणपत्र बनवाने आने वाले लोगों से रुपये लेकर उनका डेटा कृष्ण कुमार को भेजा जाता था। इसके बाद वैध आवेदनों की आड़ में फर्जी डेटा और सादे कागज अपलोड कर सीआरएस पोर्टल से कूटरचित जन्म प्रमाणपत्र डाउनलोड किए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क जीकेपी नाम के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से वाराणसी, गोरखपुर समेत अन्य जिलों तक फैला था।
एक बार ओटीपी लेकर दिनभर बनाते थे फर्जी प्रमाण पत्र
एसपी अभिनव त्यागी ने बताया कि सचिव की आईडी को ऑन किए जाने के लिए ओटीपी की आवश्यकता होती थी। कंप्यूटर ऑपरेटर प्रमाण पत्र बनाए जाने के लिए सचिव से ओटीपी लेता था। एक बार आईडी खुलने के बाद उस पर पूरा दिन काम होता था। ऐसे में कुछ तो सही प्रमाण पत्र बनाए जाते, लेकिन उसमें कई फर्जी प्रमाण पत्र भी बना दिए जाते थे। जब-जब फर्जी प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। उस समय के पंचायत सहायक की गूगल लोकेशन चेक की गई है तो वह ऑफिस में न रहकर बाहर रहता था। इस तरह पंचायत सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर दोनों मिलकर इस काम को अंजाम देते थे।