{"_id":"6595b0398fdaf6a3d1028784","slug":"bhadohi-carpets-will-spread-their-magic-in-hanover-germany-bhadohi-news-c-191-1-svns1017-7425-2024-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: जर्मनी के हनोवर में अपनी छटा बिखेरेंगे भदोही वाले गलीचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: जर्मनी के हनोवर में अपनी छटा बिखेरेंगे भदोही वाले गलीचे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भदोही। जर्मनी के हनोवर में 11 जनवरी से चार दिवसीय डोमोटेक्स फेयर शुरू हो रहा है। इसमें भदोही के गलीचे भी अपनी छटा बिखेरंगे। मेले में भारत के 250 कालीन निर्यातक शामिल होंगे। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से 150 और स्वतंत्र रूप से 100 कालीन निर्यातक इसी सप्ताह जर्मनी के लिए रवाना होंगे।
निर्यातकों को किफायती, बहुरंगी गलीचों और फ्लोर कवरिंग पर भरोसा है कि जर्मन ग्राहकों को आकर्षित करेंगे। अधिकतर निर्यातक वहां प्रदर्शित किए जाने वाले कालीन के नमूने पहले ही भेज चुके हैं। निर्यातकों ने बताया कि युवा पीढ़ी पसंद या नापसंद को ध्यान में रख कर कालीन तैयार किए जा रहे हैं।
यूक्रेन-रूस और फिलिस्तीन-इजरायल युद्ध का असर कालीन के कारोबार पर भी पड़ा है। ऐसे में जर्मनी के डोमोटेक्स से बहुत उम्मीद है। यह एक अच्छा प्लेटफार्म है। भारतीय कालीन उद्यमी वहां से तीन से छह माह का काम लेकर लौटते रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार वहां से मिले आर्डर से कलीन उद्योग को संजीवनी मिलेगी।
विज्ञापन
सीईपीसी के अधिशासी निदेशक डाॅ. स्मिता नागरकोटी ने बताया कि जो लोग डोमोटेक्स में भाग लेते हैं। उन्हें केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की योजना के तहत न केवल सस्ते दर पर स्टाल दिया जाता है, बल्कि आने जाने के हवाई टिकट खर्च का अधिकतम 90 हजार तथा माल लाने-ले जाने के खर्च का अधिकतम 50 हजार वापस मिल जाता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- --
-- निर्यातक--
कालीन और हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए डोमोटेक्स हमेशा से अच्छा प्लेटफार्म रहा है। वहां के जाने का अवसर हम छोड़ते नहीं हैं। इस बार तो और भी उम्मीदें हैं।- वासिफ अंसारी (फोटो-21)
--
दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को अच्छा काम मिल सकता है। भारत की उम्मीद डोमोटेक्स से सबसे ज्यादा होती है। -काशीनाथ यादव (फोटो-22)
--
डोमोटेक्स में जाने पर अन्य देशों के उत्पादों की जानकारी मिलती है। पता चलता है कि आगामी वर्ष किन उत्पादों की मांग होगी। इसका अलग आकर्षण है। -इफ्तेखार अहमद (फोटो-24)
--
डोमोटेक्स से हर वर्ष अच्छा कारोबार होता है। हमारे खरीदार भी बड़ी संख्या में वहां आते हैं। उनसे मुलाकात होती ही है। वैश्विक ट्रेंड का भी पता चलता है। -संजय गुप्ता (फोटो-25)
विज्ञापन
निर्यातकों को किफायती, बहुरंगी गलीचों और फ्लोर कवरिंग पर भरोसा है कि जर्मन ग्राहकों को आकर्षित करेंगे। अधिकतर निर्यातक वहां प्रदर्शित किए जाने वाले कालीन के नमूने पहले ही भेज चुके हैं। निर्यातकों ने बताया कि युवा पीढ़ी पसंद या नापसंद को ध्यान में रख कर कालीन तैयार किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
यूक्रेन-रूस और फिलिस्तीन-इजरायल युद्ध का असर कालीन के कारोबार पर भी पड़ा है। ऐसे में जर्मनी के डोमोटेक्स से बहुत उम्मीद है। यह एक अच्छा प्लेटफार्म है। भारतीय कालीन उद्यमी वहां से तीन से छह माह का काम लेकर लौटते रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार वहां से मिले आर्डर से कलीन उद्योग को संजीवनी मिलेगी।
विज्ञापन
सीईपीसी के अधिशासी निदेशक डाॅ. स्मिता नागरकोटी ने बताया कि जो लोग डोमोटेक्स में भाग लेते हैं। उन्हें केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की योजना के तहत न केवल सस्ते दर पर स्टाल दिया जाता है, बल्कि आने जाने के हवाई टिकट खर्च का अधिकतम 90 हजार तथा माल लाने-ले जाने के खर्च का अधिकतम 50 हजार वापस मिल जाता है।
कालीन और हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए डोमोटेक्स हमेशा से अच्छा प्लेटफार्म रहा है। वहां के जाने का अवसर हम छोड़ते नहीं हैं। इस बार तो और भी उम्मीदें हैं।- वासिफ अंसारी (फोटो-21)
दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को अच्छा काम मिल सकता है। भारत की उम्मीद डोमोटेक्स से सबसे ज्यादा होती है। -काशीनाथ यादव (फोटो-22)
डोमोटेक्स में जाने पर अन्य देशों के उत्पादों की जानकारी मिलती है। पता चलता है कि आगामी वर्ष किन उत्पादों की मांग होगी। इसका अलग आकर्षण है। -इफ्तेखार अहमद (फोटो-24)
डोमोटेक्स से हर वर्ष अच्छा कारोबार होता है। हमारे खरीदार भी बड़ी संख्या में वहां आते हैं। उनसे मुलाकात होती ही है। वैश्विक ट्रेंड का भी पता चलता है। -संजय गुप्ता (फोटो-25)