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कागजों में सुंदरीकरण, हकीकत में बदहाल तालाब
bhadohi news
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:53 AM IST
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देखरेख के अभाव में लखनों स्थित आदर्श तालाब का टूटा मुख्य द्वार।
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ज्ञानपुर। जल संरक्षण के लिए मुफीद तालाबों की स्थिति जिले में बदतर है। कागजों में जिस तालाब का सुंदरीकरण हो चुका है, वह हकीकत में बदहाल है। एक दो नहीं, ज्यादातर तालाबों की कमोबेश एक जैसी स्थिति है। इसमें एक है मुख्यालय से सटे आदर्श तालाब लखनों का तालाब। पांच साल तक दूसरे तालाबों के लिए आदर्श बना यह तालाब खुद ही जर्जर हो चुका है। देखरेख के अभाव में तालाब पर बना गेट जहां टूट चुका है, वहीं चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। प्रशासन की तमाम कवायद के बाद भी जिले में 1200 से अधिक तालाब अवैध कब्जे की जद में हैं।
तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त करने के लिए सु्प्रीमकोर्ट ने जहां आदेश दे दिया है वहीं सरकारें तालाबों के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही हैं। यूपीए सरकार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से तालाबों के सुंदरीकरण की शुरुआत हुई। प्रत्येक गांव में एक-एक तालाब को सुंदर बनाने की मुहिम शुरू हुई। 2009 से लेकर 2011 तक तालाबों की बेहतरी को लेकर अभियान चलाया गया। कई तालाबों की तस्वीर भी बदल गई, लेकिन देखरेख के अभाव में सभी तालाबों की स्थिति एक जैसी हो गई। कागजों में यह तालाब तो आज भी आदर्श हैं लेकिन हकीकत में वहां सबकुछ खत्म हो चुका है। राजस्व विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो तीनों तहसीलों में अब भी 1200 से अधिक तालाब अवैध कब्जे की जद में है। प्रशासन की ओर से कभी कभार तालाबों से अवैध कब्जे को हटाने की मुहिम तो शुरू होती है, लेकिन वह कम समय में ही ठंडा हो जाता है। इससे तालाबों की स्थिति बेहतर करने का प्रयास असफल ही साबित हो रहा है।
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तालाबों को अवैध कब्जे से मुक्त करने के लिए सु्प्रीमकोर्ट ने जहां आदेश दे दिया है वहीं सरकारें तालाबों के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही हैं। यूपीए सरकार में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से तालाबों के सुंदरीकरण की शुरुआत हुई। प्रत्येक गांव में एक-एक तालाब को सुंदर बनाने की मुहिम शुरू हुई। 2009 से लेकर 2011 तक तालाबों की बेहतरी को लेकर अभियान चलाया गया। कई तालाबों की तस्वीर भी बदल गई, लेकिन देखरेख के अभाव में सभी तालाबों की स्थिति एक जैसी हो गई। कागजों में यह तालाब तो आज भी आदर्श हैं लेकिन हकीकत में वहां सबकुछ खत्म हो चुका है। राजस्व विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो तीनों तहसीलों में अब भी 1200 से अधिक तालाब अवैध कब्जे की जद में है। प्रशासन की ओर से कभी कभार तालाबों से अवैध कब्जे को हटाने की मुहिम तो शुरू होती है, लेकिन वह कम समय में ही ठंडा हो जाता है। इससे तालाबों की स्थिति बेहतर करने का प्रयास असफल ही साबित हो रहा है।
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