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Bhadohi News: अचलेश्वर नाथ मंदिर श्रद्धालुओं को समर्पित
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सीतामढ़ी। कोनिया क्षेत्र में एक स्वर्णिम इतिहास जुड़ गया है। महादेवा गंगा के पावन तट पर नव निर्मित सुंदर, दिव्य, भव्य और नव्य शिव मंदिर शुक्रवार को वैदिक विधि विधान पूर्वक श्रद्धालुओं को समर्पित किया गया। यह मंदिर अचलेश्वर नाथ धाम से जाना जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन किए। महादेव के अलौकिक स्वरुप का दर्शन कर हर कोई हर्षित हो उठा।
मंदिर लाल पत्थरों से आधुनिक तकनीकी से बनाया गया है। शिव मंदिर के शिखर और दीवारों पर की गई सुंदर व अद्भुत नक्काशी अप्रतिम है। मंदिर के ठीक सामने 41 फीट ऊंचा लाल पत्थरों से पत्थर के कछुए की पीठ पर बनाया गया, त्रिशूल लोगों के आकर्षक का केंद्र है। मंदिर में स्थापित स्वयं-भू शिवलिंग प्राचीन काल का है।
इस पुनीत स्थल से पूर्वांचल के कई जिलों के श्रद्धालुओं की असीम आस्था एवं श्रद्धा जुड़ी है। अचलेश्वरनाथ धाम अति सुंदर और रमणीक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। सीतामढ़ी से महज पांच किमी की दूरी पर है। पांच जुलाई से शुरू हुआ ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन बृहस्पतिवार देर रात को संपन्न हुआ। सात दिनों तक अखंड भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं दूसरी ओर पर्यटन के विकास को लेकर क्षेत्रवासियों ने सीतामढ़ी कॉरिडोर बनाने की मांग शासन- प्रशासन से की है। कहा कि सीतामढ़ी विकास कॉरिडोर बना कर गंगा तटीय धार्मिक स्थलों सीतामढ़ी, अचलेश्वरनाथ महादेवा, सेमराधनाथ धाम, योगेश्वर नाथ धाम और पश्चिम वाहिनी गंगा को एक सूत्र में संजोकर पर्यटन हब बनाया जाए। अचलेश्वर मंदिर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कराने वाले युवा धर्मनिष्ठ राघवेंद्र दूबे का कहना है की भगवान की कृपा से ही मंदिर निर्माण हुआ है। इसी तरह क्षेत्र के प्रमुख समाज सेवी राहुल दूबे का कहना है की धार्मिक क्षेत्र कोनिया में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं।
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मंदिर लाल पत्थरों से आधुनिक तकनीकी से बनाया गया है। शिव मंदिर के शिखर और दीवारों पर की गई सुंदर व अद्भुत नक्काशी अप्रतिम है। मंदिर के ठीक सामने 41 फीट ऊंचा लाल पत्थरों से पत्थर के कछुए की पीठ पर बनाया गया, त्रिशूल लोगों के आकर्षक का केंद्र है। मंदिर में स्थापित स्वयं-भू शिवलिंग प्राचीन काल का है।
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इस पुनीत स्थल से पूर्वांचल के कई जिलों के श्रद्धालुओं की असीम आस्था एवं श्रद्धा जुड़ी है। अचलेश्वरनाथ धाम अति सुंदर और रमणीक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। सीतामढ़ी से महज पांच किमी की दूरी पर है। पांच जुलाई से शुरू हुआ ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन बृहस्पतिवार देर रात को संपन्न हुआ। सात दिनों तक अखंड भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं दूसरी ओर पर्यटन के विकास को लेकर क्षेत्रवासियों ने सीतामढ़ी कॉरिडोर बनाने की मांग शासन- प्रशासन से की है। कहा कि सीतामढ़ी विकास कॉरिडोर बना कर गंगा तटीय धार्मिक स्थलों सीतामढ़ी, अचलेश्वरनाथ महादेवा, सेमराधनाथ धाम, योगेश्वर नाथ धाम और पश्चिम वाहिनी गंगा को एक सूत्र में संजोकर पर्यटन हब बनाया जाए। अचलेश्वर मंदिर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माण कराने वाले युवा धर्मनिष्ठ राघवेंद्र दूबे का कहना है की भगवान की कृपा से ही मंदिर निर्माण हुआ है। इसी तरह क्षेत्र के प्रमुख समाज सेवी राहुल दूबे का कहना है की धार्मिक क्षेत्र कोनिया में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं।
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