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आम आदमी पार्टी का घोटाले के खिलाफ मटका फोड़ प्रदर्शन
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ज्ञानपुर। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने घोटाले के खिलाफ बुधवार को शीतल पाल तिराहे पर मटका फोड़ प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस दौरान जिलाध्यक्ष मनोज गुप्ता ने आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन योजनांतर्गत उत्तर प्रदेश को 1.20,000 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था जिसका अभी तक सार्थक परिणाम सामने नहीं आ सका।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति मंत्री डा.महेंद्र सिंह ने रश्मि मटेलिक्स कंपनी को उपकरण पहुंचाने का टेंडर देकर शांत हो गए। जिसका परिणाम है कि एक भी घरों तक न पाइप लाइन पहुंच सकी न टोटी लग सकी। मामले का घोटाला जब आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने उजागर कर दिया तो केंद्र और प्रदेश की सरकार अपनी कमी को छिपाने के लिए उल्टे सांसद को टार्चर करा रही है। यही स्थिति सात अन्य प्रदेशों को आवंटित हुई धनराशि में देखा जा रहा है। जबकि केंद्रीय आर्थिक सूचना ब्यूरो अपनी जांच में फर्जी निवेश दिखाकर जनता को धोखा देने का काम सरकार के जनप्रतिनिधि कर रहे हैं। जिले में दो दशक से स्थापित पेयजल इकाइयां पूरी तरह से शुद्ध पेयजल पहुंचाने में असमर्थ है।
वहीं दूसरी ओर जलनिगम विभाग में तैनात अधिकारी बजट का रोना रोकर कर्मचारियों का फंड-बोनस देने के लिए मोहताज है। यहां तक कि प्रदेश सरकार जलनिगम के दर्जनों कर्मचारियों को दूसरे विभागों में विलय करने की तैयारी कर चुकी है। पेयजल इकाइयों की क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों से पानी पहुंचना मुश्किल है। भवन, टंकी, कब गिर जाएंगे कुछ नहीं कहा जा सकता और मोटर, ट्रांसफार्मर खराब होकर पर तब तक नहीं बदले जाते जब तक विरोध-प्रदर्शन शुरू नहीं होता है। जल जीवन मिशन के कार्यकारी निदेशक, यूनिट कोआर्डिनेटर, परियोजना प्रबंधक, पूर्व मुख्य अभियंता, मंत्री, टेंडर लेने वाली कंपनी की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शन करने वालों में लवकुश, अशोक यादव, कलाधर दुबे, इजहार अहमद, राजधर बिंद, महेंद्र पाल, बालकृष्ण बिंद, सीमा खान, अनूप यादव, आनंद मिश्र रहे।
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उन्होंने कहा कि जल शक्ति मंत्री डा.महेंद्र सिंह ने रश्मि मटेलिक्स कंपनी को उपकरण पहुंचाने का टेंडर देकर शांत हो गए। जिसका परिणाम है कि एक भी घरों तक न पाइप लाइन पहुंच सकी न टोटी लग सकी। मामले का घोटाला जब आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने उजागर कर दिया तो केंद्र और प्रदेश की सरकार अपनी कमी को छिपाने के लिए उल्टे सांसद को टार्चर करा रही है। यही स्थिति सात अन्य प्रदेशों को आवंटित हुई धनराशि में देखा जा रहा है। जबकि केंद्रीय आर्थिक सूचना ब्यूरो अपनी जांच में फर्जी निवेश दिखाकर जनता को धोखा देने का काम सरकार के जनप्रतिनिधि कर रहे हैं। जिले में दो दशक से स्थापित पेयजल इकाइयां पूरी तरह से शुद्ध पेयजल पहुंचाने में असमर्थ है।
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वहीं दूसरी ओर जलनिगम विभाग में तैनात अधिकारी बजट का रोना रोकर कर्मचारियों का फंड-बोनस देने के लिए मोहताज है। यहां तक कि प्रदेश सरकार जलनिगम के दर्जनों कर्मचारियों को दूसरे विभागों में विलय करने की तैयारी कर चुकी है। पेयजल इकाइयों की क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों से पानी पहुंचना मुश्किल है। भवन, टंकी, कब गिर जाएंगे कुछ नहीं कहा जा सकता और मोटर, ट्रांसफार्मर खराब होकर पर तब तक नहीं बदले जाते जब तक विरोध-प्रदर्शन शुरू नहीं होता है। जल जीवन मिशन के कार्यकारी निदेशक, यूनिट कोआर्डिनेटर, परियोजना प्रबंधक, पूर्व मुख्य अभियंता, मंत्री, टेंडर लेने वाली कंपनी की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शन करने वालों में लवकुश, अशोक यादव, कलाधर दुबे, इजहार अहमद, राजधर बिंद, महेंद्र पाल, बालकृष्ण बिंद, सीमा खान, अनूप यादव, आनंद मिश्र रहे।
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