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माता के दरबार में टूटा दुखों का पहाड़
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औराई के सूर्या ट्रामा सेंटर से बीएचयू रेफर होते मरीज। संवाद
- फोटो : BHADOHI
माता के दरबार में दो परिवारों पर टूटा गमों का पहाड़
फोटो:
पूर्व प्रधान के परिवार के आठ लोग झुलसे, तीन की हो चुकी है मौत
जेठूपुर गांव के दीपक के छोटे बेटे की मौत, तीन बच्चे अस्पताल में भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
औराई/घोसियां। औराई के नरथुआं में रविवार की रात हुए अग्निकांड से दो परिवारों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। जेठूपुर के दीपक सेठ के छोटे बेटे अंकुश सोनी कीमौत हो गई है। वहीं, बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति की पत्नी और दो नातियों की जान जा चुकी है। इनके परिवार के पांच से अधिक बच्चों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
औराई स्थित पंडाल में आसपास के दर्जन भर गांव की महिलाएं और पुरुष आरती संग शो देखने पहुंचे थे। हादसे में सबसे अधिक जेठूपुर, बारीगांव और सेऊर गांव के लोग प्रभावित हुए हैं। जेठूपुर के करीब 12, बारीगांव के 25 और सेऊर के 15 लोग अग्निकांड के शिकार हुए हैं। बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति के कुनबे के आठ लोग झुलसे हैं। उनकी पत्नी, दो नातियों की मौत हो चुकी है। पांच बच्चे अब भी बीएचयू, ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जेठूपुर गांव के दीपक सोनी पर मानो ईश्वर ने तुषारापात कर दिया है। उनके छोटे बेटे अंकुश सोनी की घटना में मौत हो चुकी है। सोमवार को वह बेसुध घर के बाहर बैठे रहे। महिलाओं और रिश्तेदारों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन नजर आया।
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पहले पति और अब इकलौते बेटे को भी खोया
-खुद भी हॉस्पिटल में लड़ रही जिंदगी और मौत की जंग
संवाद न्यूज एजेंसी
घोसिया। औराई अग्निकांड में झुलसी सीमा देवी (40) का कबीरचौरा हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शायद वह ठीक होकर घर भी आ जाएं, लेकिन उसे क्या पता कि अब उसकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी है। पहले पति और अब एकलौते बेटे को खो कर सीमा कैसे जीएगी, यह सोचकर ही रिश्तेदार चिंतित हैं।
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सीमा के पति की 2018 में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी। जिसके बाद से उसका एकलौता सहारा उनका बेटा हर्षवर्धन ही था। वह उसे बड़े लाड-प्यार से रखती थी। रविवार को अग्निकांड में प्रकृति के क्रूर खेल ने उनसे इकलौता सहारा भी छीन लिया। अगलगी में उनके बेटे हर्षवर्धन (7) की मौत हो गयी। सीमा की पहले मांग उजड़ी और अब कोख भी सूनी हो चुकी है। सीमा की हालत देख हर कोई भगवान से शिकायत करता नजर आया।
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झुलसे चेहरों पर उम्र भर रहेगी हादसे की छाप
झुलसने से बने दाग के कारण युवतियों की शादी में हो सकती है मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। औराई अग्निकांड पीड़ितों के हिस्से में जिंदगी भर का जख्म दे गया। शायद यह जिले का पहला ऐसा हादसा है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोग झुलसे हैं। दुर्गापूजा पंडाल में चल रहे शो देखने के लिए जुटे लोगों को यह नहीं पता था कि यह शो उनके जीवन में एक ऐसा जख्म देगा, जो कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
प्रशासनिक आंकड़े के मुताबिक अग्निकांड में कुल 68 लोग झुलसे हुए हैं। पांच लोगों की मौत हुई है। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं और युवतियों की है। हालांकि कुछ का कहना है कि अग्निकांड में करीब 50 की संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे झुलसे हैं। आग लगने के बाद पंडाल के ऊपर लगा प्लास्टिक का त्रिपाल गर्मी के कारण गल-गल कर गिरने लगा, जिसकी चपेट में महिलाएं-युवतियां आईं। उनके चेहरे तथा शरीर के ऊपरी की चमड़ी उखड़ गई है। इनके चेहरे भर लगा झुलसने का दाग अब ताउम्र बना रहेगा। दिक्कत उन युवतियों को होगी, जो अभी अविवाहित हैं। उनकी शादी में अब दिक्कत आ सकती है।
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झुलसने के दर्द से ज्यादा ज्योति को रुला रही थी गरीबी
गंभीर रूप से जलने के बाद भी इलाज के लिए वाराणसी जाने को नहीं थी तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
औराई। गरीबी आदमी को कितना मजबूर कर सकती है, यह औराई अग्निकांड में झुलसी उपरौत निवासी ज्योति (17) की स्थिति से पता चलता है। देर शाम गांव की सहेलियों के साथ दुर्गा पूजा पंडाल देखने निकली ज्योति आग लगने के बाद बुरी तरह झुलस गयी है। उसके चेहरे का बायां हिस्सा, पैर का निचला हिस्सा और सीना और पीठ बुरी तरह से जल चुका है। गंभीर अवस्था में उसे सीएचसी औराई लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका ट्रीटमेंट शुरू किया। उसकी अवस्था बिगड़ता देख डॉक्टर उसे बीएचयू रेफर करने की बात करने लगे। लेकिन रूह कंपा देने वाली दर्द को सहन करके भी वह पड़ी रही। डॉक्टर उसे बार-बार वाराणसी रेफर करना चाहते थे लेकिन वह जाने को तैयार नहीं थी। लोगों ने जब पूछा कि वह बनारस क्यों नहीं जाना चाहती, तब उसने बताया कि हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि हम इलाज करा पाएं। बताया कि उसका कोई गार्जियन भी नहीं है। पिता जी बाहर रहते हैं, ऐसे में इलाज कैसे होगा और कौन इसका खर्चा देगा? ये सुनकर हर कोई सिर्फ आह भर कर रह गया। हालांकि बाद में समझाने-बुझाने के बाद वह बनारस जाने को तैयार हो गयी।
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फोटो:
पूर्व प्रधान के परिवार के आठ लोग झुलसे, तीन की हो चुकी है मौत
जेठूपुर गांव के दीपक के छोटे बेटे की मौत, तीन बच्चे अस्पताल में भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
औराई/घोसियां। औराई के नरथुआं में रविवार की रात हुए अग्निकांड से दो परिवारों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। जेठूपुर के दीपक सेठ के छोटे बेटे अंकुश सोनी कीमौत हो गई है। वहीं, बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति की पत्नी और दो नातियों की जान जा चुकी है। इनके परिवार के पांच से अधिक बच्चों का अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
औराई स्थित पंडाल में आसपास के दर्जन भर गांव की महिलाएं और पुरुष आरती संग शो देखने पहुंचे थे। हादसे में सबसे अधिक जेठूपुर, बारीगांव और सेऊर गांव के लोग प्रभावित हुए हैं। जेठूपुर के करीब 12, बारीगांव के 25 और सेऊर के 15 लोग अग्निकांड के शिकार हुए हैं। बारीगांव के पूर्व प्रधान रमापति के कुनबे के आठ लोग झुलसे हैं। उनकी पत्नी, दो नातियों की मौत हो चुकी है। पांच बच्चे अब भी बीएचयू, ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जेठूपुर गांव के दीपक सोनी पर मानो ईश्वर ने तुषारापात कर दिया है। उनके छोटे बेटे अंकुश सोनी की घटना में मौत हो चुकी है। सोमवार को वह बेसुध घर के बाहर बैठे रहे। महिलाओं और रिश्तेदारों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन नजर आया।
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पहले पति और अब इकलौते बेटे को भी खोया
-खुद भी हॉस्पिटल में लड़ रही जिंदगी और मौत की जंग
संवाद न्यूज एजेंसी
घोसिया। औराई अग्निकांड में झुलसी सीमा देवी (40) का कबीरचौरा हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। शायद वह ठीक होकर घर भी आ जाएं, लेकिन उसे क्या पता कि अब उसकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी है। पहले पति और अब एकलौते बेटे को खो कर सीमा कैसे जीएगी, यह सोचकर ही रिश्तेदार चिंतित हैं।
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सीमा के पति की 2018 में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी। जिसके बाद से उसका एकलौता सहारा उनका बेटा हर्षवर्धन ही था। वह उसे बड़े लाड-प्यार से रखती थी। रविवार को अग्निकांड में प्रकृति के क्रूर खेल ने उनसे इकलौता सहारा भी छीन लिया। अगलगी में उनके बेटे हर्षवर्धन (7) की मौत हो गयी। सीमा की पहले मांग उजड़ी और अब कोख भी सूनी हो चुकी है। सीमा की हालत देख हर कोई भगवान से शिकायत करता नजर आया।
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झुलसे चेहरों पर उम्र भर रहेगी हादसे की छाप
झुलसने से बने दाग के कारण युवतियों की शादी में हो सकती है मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। औराई अग्निकांड पीड़ितों के हिस्से में जिंदगी भर का जख्म दे गया। शायद यह जिले का पहला ऐसा हादसा है जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोग झुलसे हैं। दुर्गापूजा पंडाल में चल रहे शो देखने के लिए जुटे लोगों को यह नहीं पता था कि यह शो उनके जीवन में एक ऐसा जख्म देगा, जो कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
प्रशासनिक आंकड़े के मुताबिक अग्निकांड में कुल 68 लोग झुलसे हुए हैं। पांच लोगों की मौत हुई है। इसमें बड़ी संख्या महिलाओं और युवतियों की है। हालांकि कुछ का कहना है कि अग्निकांड में करीब 50 की संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे झुलसे हैं। आग लगने के बाद पंडाल के ऊपर लगा प्लास्टिक का त्रिपाल गर्मी के कारण गल-गल कर गिरने लगा, जिसकी चपेट में महिलाएं-युवतियां आईं। उनके चेहरे तथा शरीर के ऊपरी की चमड़ी उखड़ गई है। इनके चेहरे भर लगा झुलसने का दाग अब ताउम्र बना रहेगा। दिक्कत उन युवतियों को होगी, जो अभी अविवाहित हैं। उनकी शादी में अब दिक्कत आ सकती है।
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झुलसने के दर्द से ज्यादा ज्योति को रुला रही थी गरीबी
गंभीर रूप से जलने के बाद भी इलाज के लिए वाराणसी जाने को नहीं थी तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
औराई। गरीबी आदमी को कितना मजबूर कर सकती है, यह औराई अग्निकांड में झुलसी उपरौत निवासी ज्योति (17) की स्थिति से पता चलता है। देर शाम गांव की सहेलियों के साथ दुर्गा पूजा पंडाल देखने निकली ज्योति आग लगने के बाद बुरी तरह झुलस गयी है। उसके चेहरे का बायां हिस्सा, पैर का निचला हिस्सा और सीना और पीठ बुरी तरह से जल चुका है। गंभीर अवस्था में उसे सीएचसी औराई लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसका ट्रीटमेंट शुरू किया। उसकी अवस्था बिगड़ता देख डॉक्टर उसे बीएचयू रेफर करने की बात करने लगे। लेकिन रूह कंपा देने वाली दर्द को सहन करके भी वह पड़ी रही। डॉक्टर उसे बार-बार वाराणसी रेफर करना चाहते थे लेकिन वह जाने को तैयार नहीं थी। लोगों ने जब पूछा कि वह बनारस क्यों नहीं जाना चाहती, तब उसने बताया कि हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि हम इलाज करा पाएं। बताया कि उसका कोई गार्जियन भी नहीं है। पिता जी बाहर रहते हैं, ऐसे में इलाज कैसे होगा और कौन इसका खर्चा देगा? ये सुनकर हर कोई सिर्फ आह भर कर रह गया। हालांकि बाद में समझाने-बुझाने के बाद वह बनारस जाने को तैयार हो गयी।