{"_id":"62b211afda26eb0aee273e0f","slug":"95-percent-schools-not-connected-to-the-internet-bhadohi-news-vns66008009","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंटरनेट से नहीं जुड़े 95 फीसदी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंटरनेट से नहीं जुड़े 95 फीसदी स्कूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी स्कूलों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने की मुहिम परवान नहीं चढ़ पा रही है। करीब दो साल में मात्र पांच फीसदी विद्यालय ही जुड़ सके हैं। हालांकि वे भी सक्रिय नहीं हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास के संचालन के लिए शिक्षक अपने मोबाइल या अन्य सुविधाओं से बच्चों को आधुनिक शिक्षा दे रहे हैं।
कान्वेंट स्कूलों की तरह प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प संग अन्य मदों से विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्मार्ट क्लास की व्यवस्था लागू करने के बाबत परिषदीय विद्यालयों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए दो साल पूर्व शासनस्तर से दिशानिर्देश जारी किया गया था। ताकि विद्यालयों में प्रोजेक्टर, लैपटॉप और एलईडी का संचालन सुगमता के साथ किया जा सके, लेकिन जिले में यह व्यवस्था सुस्त रफ्तार से चल रही है। फाइबर कनेक्टिविटी के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में 200 से अधिक विद्यालयों को इंटरनेट से जोड़ा जाना है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि 891 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में से मात्र 40 से 50 स्कूलों में ही यह व्यवस्था पूर्ण हो सकी है। जिन ग्राम पंचायतों ने सक्रियता दिखाई, वहां इंटरनेट के लिए केबल आदि लग चुका है, लेकिन वे सक्रिय नहीं हो सके हैं। प्राथमिक विद्यालय चितईपुर, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय भुलईपुर, प्राथमिक विद्यालय चककलूटी सहित 40 से अधिक विद्यालयों में चलने वाले स्मार्ट क्लास शिक्षक अपने मोबाइल या अन्य सुविधाओं से चलाते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि ग्राम सचिवालयों के साथ ही स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। ग्राम पंचायतों को ही यह काम कराना है। अभी तक कुछ ही स्कूलों में इंटरनेट पहुंच सका है।
विज्ञापन
कान्वेंट स्कूलों की तरह प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की सुविधाओं में सुधार किया जा रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प संग अन्य मदों से विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्मार्ट क्लास की व्यवस्था लागू करने के बाबत परिषदीय विद्यालयों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए दो साल पूर्व शासनस्तर से दिशानिर्देश जारी किया गया था। ताकि विद्यालयों में प्रोजेक्टर, लैपटॉप और एलईडी का संचालन सुगमता के साथ किया जा सके, लेकिन जिले में यह व्यवस्था सुस्त रफ्तार से चल रही है। फाइबर कनेक्टिविटी के माध्यम से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में 200 से अधिक विद्यालयों को इंटरनेट से जोड़ा जाना है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि 891 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में से मात्र 40 से 50 स्कूलों में ही यह व्यवस्था पूर्ण हो सकी है। जिन ग्राम पंचायतों ने सक्रियता दिखाई, वहां इंटरनेट के लिए केबल आदि लग चुका है, लेकिन वे सक्रिय नहीं हो सके हैं। प्राथमिक विद्यालय चितईपुर, कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय भुलईपुर, प्राथमिक विद्यालय चककलूटी सहित 40 से अधिक विद्यालयों में चलने वाले स्मार्ट क्लास शिक्षक अपने मोबाइल या अन्य सुविधाओं से चलाते हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि ग्राम सचिवालयों के साथ ही स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। ग्राम पंचायतों को ही यह काम कराना है। अभी तक कुछ ही स्कूलों में इंटरनेट पहुंच सका है।
विज्ञापन