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खरीफ प्याज की खेती करें, मुनाफा कमाएं
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:31 AM IST
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ज्ञानपुर। जून के अंतिम सप्ताह में जब किसान धान की खेती के लिए इंद्रदेव की मेहरबानियों का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में खरीफ प्याज की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। कम पानी वाले खेत में लगाई जाने वाली खरीफ प्याज की फसल से किसान कम लागत में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं। जिले के कुछ गांवों में किसान खरीफ प्याज की खेती कर बेहतर उत्पादन ले रहे हैं।
खरीफ प्याज की खेती की शुरुआत करने का यह उपयुक्त समय है। जानकारों के मुताबिक इस समय खरीफ प्याज की नर्सरी डाल दी जानी चाहिए। अगस्त में इसकी रोपाई की जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी के अनुसार खरीफ प्याज की किस्म एग्रीफाउंड डार्क रेड किसानों को बेहतर उत्पादन दे रही है। एनएचआरडीएफ (सरकारी बीज भंडार) पर इसके बीज मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्याज की खेती के लिए ऐसे खेत का चुनाव करना चाहिए, जहां पानी न लगे। रोपाई करते समय लाइन से लाइन की दूूरी 25 सेमी. और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 12 सेमी. रखनी चाहिए। नर्सरी डालने से पूर्व बीजशोधन जरूरी है। इसलिए 2.5 ग्राम कारबेंडाजिन प्रतिकिग्रा. बीज के शोधन के लिए उपयुक्त है। डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक खरीफ प्याज के इस किस्म की खासियत यह है कि प्रति हेक्टेयर इसकी चार सौ क्विंटल की पैदावार देती है। मसलन लगभग 50 क्विंटल बीघा। दिसंबर में ऐसे वक्त इसकी खोदाई होती है, जब बाजार में प्याज की कीमत ऊंची होती है। इससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है। गौरतलब है कि क्षेत्र के चकसुंदर, निदूर आदि गांवों में तकरीबन चार साल से किसान खरीफ प्याज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
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खरीफ प्याज की खेती की शुरुआत करने का यह उपयुक्त समय है। जानकारों के मुताबिक इस समय खरीफ प्याज की नर्सरी डाल दी जानी चाहिए। अगस्त में इसकी रोपाई की जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी के अनुसार खरीफ प्याज की किस्म एग्रीफाउंड डार्क रेड किसानों को बेहतर उत्पादन दे रही है। एनएचआरडीएफ (सरकारी बीज भंडार) पर इसके बीज मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्याज की खेती के लिए ऐसे खेत का चुनाव करना चाहिए, जहां पानी न लगे। रोपाई करते समय लाइन से लाइन की दूूरी 25 सेमी. और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 12 सेमी. रखनी चाहिए। नर्सरी डालने से पूर्व बीजशोधन जरूरी है। इसलिए 2.5 ग्राम कारबेंडाजिन प्रतिकिग्रा. बीज के शोधन के लिए उपयुक्त है। डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक खरीफ प्याज के इस किस्म की खासियत यह है कि प्रति हेक्टेयर इसकी चार सौ क्विंटल की पैदावार देती है। मसलन लगभग 50 क्विंटल बीघा। दिसंबर में ऐसे वक्त इसकी खोदाई होती है, जब बाजार में प्याज की कीमत ऊंची होती है। इससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है। गौरतलब है कि क्षेत्र के चकसुंदर, निदूर आदि गांवों में तकरीबन चार साल से किसान खरीफ प्याज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
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