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तीसरे दिन गुलजार हो सके खेत-खलिहान,मड़ाई में जुटे किसान
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ज्ञानपुर। आंधी-बारिश के बीच दो दिनों तक मौसम में छाई नरमी तीसरे दिन शनिवार को तापमान 40 के करीब पहुंचते ही खत्म हो गई। इससे खेत और खलिहान गुलजार हो उठे। किसान परिवार के साथ खेतों में पहुंचकर गेहूं की फसल की मड़ाई कराने में जुट गए। तो वहीं ट्रैक्टर चालित थ्रेसरों की रफ्तार चौगुनी हो गई।
दो दिन पहले मौसम के अचानक करवट बदलते ही तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश ने खेतों में काट-बांध कर छोड़ी गई गेहूं की फसलों को भींगा देने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे किसानों को इस बात की अधिक तकलीफ रही कि यदि मौसम ने साथ न दिया तो वर्ष भर परिवार पेट भरने के लिए अन्न का मोहताज बना रहेगा। दूसरे ही दिन से तेज धूप का असर भींगी फसलों पर पड़ते ही वह मड़ाई की कगार पर पहुंचने लगीं। तीसरे दिन शनिवार की सुबह से खेत-खलिहानों में गेहूं मड़ाई का कार्य गति पकड़ लिया। किसानों की मानें तो मौसम खराब होने से पहले 20 फीसद किसान ही मड़ाई कर पाए थे और 80 फीसद फसलें खेतों में मौसम की मार झेलती रहीं। अचानक बढ़े तापमान के बीच गर्मी के भी चरम पर पहुंच जाने से जनमानस की व्याकुलता बढ़ गई। धूप और गर्मी की परवाह किए बिना किसान परिवार मुंह के निवाले को जल्द से जल्द घर पहुंचाने और पशु चारा के रूप में प्राप्त होने वाले भूसे को एकत्रित करने की जोर आजमाइश जोर पकड़े रही।
नहीं लग रहा नंबर, मांगी जा रही मोहलत
ज्ञानपुर। भले ही खेती-बारी में व्यापक पैमाने पर बदलाव आया और नई-नई तकनीकियां ईजाद हुईं फिर भी किसानों को नंबर लगाना ही पड़ता है। विद्युत चालित थ्रेसरों की अपेक्षा अब ट्रैक्टर चालित हाई पावर के थ्रेसरों की डिमांड अधिक बढ़ गई है। कारण भी स्पष्ट है कि पूर्व के दिनों में बारिश शुरु होने तक कटाई और मड़ाई का कार्य चलता था। अब एक घंटे में बीघे भर की फसल मड़ाई कर साफ-सुथरे दाने घरों तक पहुंचा दिए जा रहे हैं। दो दिन तक ठप पड़े मड़ाई कार्य को गति मिलते ही किसान भोर से ही थ्रेसर स्वामियों की नींद हराम कर दे रहे हैं। जहां थ्रेसर स्वामी भी मौसम की नजाकत को देख अपना काम निबटाने के बाद ही दूसरे को वरीयता देने में भलाई समझ रहे हैं।
दो दिन पहले मौसम के अचानक करवट बदलते ही तेज हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश ने खेतों में काट-बांध कर छोड़ी गई गेहूं की फसलों को भींगा देने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे किसानों को इस बात की अधिक तकलीफ रही कि यदि मौसम ने साथ न दिया तो वर्ष भर परिवार पेट भरने के लिए अन्न का मोहताज बना रहेगा। दूसरे ही दिन से तेज धूप का असर भींगी फसलों पर पड़ते ही वह मड़ाई की कगार पर पहुंचने लगीं। तीसरे दिन शनिवार की सुबह से खेत-खलिहानों में गेहूं मड़ाई का कार्य गति पकड़ लिया। किसानों की मानें तो मौसम खराब होने से पहले 20 फीसद किसान ही मड़ाई कर पाए थे और 80 फीसद फसलें खेतों में मौसम की मार झेलती रहीं। अचानक बढ़े तापमान के बीच गर्मी के भी चरम पर पहुंच जाने से जनमानस की व्याकुलता बढ़ गई। धूप और गर्मी की परवाह किए बिना किसान परिवार मुंह के निवाले को जल्द से जल्द घर पहुंचाने और पशु चारा के रूप में प्राप्त होने वाले भूसे को एकत्रित करने की जोर आजमाइश जोर पकड़े रही।
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नहीं लग रहा नंबर, मांगी जा रही मोहलत
ज्ञानपुर। भले ही खेती-बारी में व्यापक पैमाने पर बदलाव आया और नई-नई तकनीकियां ईजाद हुईं फिर भी किसानों को नंबर लगाना ही पड़ता है। विद्युत चालित थ्रेसरों की अपेक्षा अब ट्रैक्टर चालित हाई पावर के थ्रेसरों की डिमांड अधिक बढ़ गई है। कारण भी स्पष्ट है कि पूर्व के दिनों में बारिश शुरु होने तक कटाई और मड़ाई का कार्य चलता था। अब एक घंटे में बीघे भर की फसल मड़ाई कर साफ-सुथरे दाने घरों तक पहुंचा दिए जा रहे हैं। दो दिन तक ठप पड़े मड़ाई कार्य को गति मिलते ही किसान भोर से ही थ्रेसर स्वामियों की नींद हराम कर दे रहे हैं। जहां थ्रेसर स्वामी भी मौसम की नजाकत को देख अपना काम निबटाने के बाद ही दूसरे को वरीयता देने में भलाई समझ रहे हैं।
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