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...ब्राह्मणों का लालची व अहंकारी नहीं होना चाहिए
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गोपीगंज। नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक शिवशंकर बैरागी महाराज ने सुदामा चरित्र के प्रसंग के जरिए ब्राह्मणत्व का मर्म समझाया। कहा कि ब्राह्मणों को लालच और अहंकार से बचना चाहिए। यही जीवन को गर्त में ले जाता है। सद्मार्ग पर चलने वाला ब्राह्मण ही सुदामा का गौरव हासिल कर सकता है।
सुदामा चरित्र पर कहा कि पत्नी सुशीला के लाख समझाने पर भी सुदामा ने अपने बालसखा द्वारिकाधीश से कुछ मांगने से इनकार कर दिया। तब सुशीला ने यह कहते हुए सुदामा को मनाया कि मित्र देवता आपको कुछ मांगने के लिए नहीं बल्कि एक बार मिलकर दर्शन करने को कहा जा रहा है। सुदामा बालसखा श्रीकृष्ण की वैभव-दिव्यता और भव्यता को मन ही मन प्रणाम कर चावल की गठरी के साथ नदी किनारे पहुंच गए, जहां केवट के रूप में श्रीकृष्ण सुदामा को नाव पर चढ़ाने के लिए पहले ही आ गए। द्वारिकापुरी पहुंचने के बाद प्रभु की कृपा से सुदामा के जीवनस्तर बदलने की कथा सुनाई। कहा कि यदि भक्त सच्चे मन से भक्ति प्रकट कर दे तो उसका जीवन बदल जाता है। कथा समापन के बाद देर शाम भंडारा आयोजित कर प्रसाद वितरित कराया गया। इस मौके पर शेषप्रकाश जायसवाल, अशोक जायसवाल, रामजी समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष भक्त मौजूद रहे।
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सुदामा चरित्र पर कहा कि पत्नी सुशीला के लाख समझाने पर भी सुदामा ने अपने बालसखा द्वारिकाधीश से कुछ मांगने से इनकार कर दिया। तब सुशीला ने यह कहते हुए सुदामा को मनाया कि मित्र देवता आपको कुछ मांगने के लिए नहीं बल्कि एक बार मिलकर दर्शन करने को कहा जा रहा है। सुदामा बालसखा श्रीकृष्ण की वैभव-दिव्यता और भव्यता को मन ही मन प्रणाम कर चावल की गठरी के साथ नदी किनारे पहुंच गए, जहां केवट के रूप में श्रीकृष्ण सुदामा को नाव पर चढ़ाने के लिए पहले ही आ गए। द्वारिकापुरी पहुंचने के बाद प्रभु की कृपा से सुदामा के जीवनस्तर बदलने की कथा सुनाई। कहा कि यदि भक्त सच्चे मन से भक्ति प्रकट कर दे तो उसका जीवन बदल जाता है। कथा समापन के बाद देर शाम भंडारा आयोजित कर प्रसाद वितरित कराया गया। इस मौके पर शेषप्रकाश जायसवाल, अशोक जायसवाल, रामजी समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष भक्त मौजूद रहे।
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