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हत्या के दोषी को आजीवन कारावास की सजा
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:38 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला और उसके बेटे की हत्या मामले में दोषी को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा दी। छह साल पूर्व घनश्यामपुर गांव के पाल बस्ती में हुई घटना में न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
घटना के मुताबिक, गोपीगंज थानाक्षेत्र के घनश्यामपुर निवासी रामचंद्र पाल ने आरोप लगाया था कि उसके भाई मानिकचंद्र पाल और उसका परिवार पाही पर रहता था। 26-27 अप्रैल 2011 की रात अज्ञात लोगों ने मेरे भाई के परिवार के सदस्य बेलानी देवी, अवतारी देवी और सुनील पाल को गंभीर रूप से मारपीट कर घायल कर दिया। वहां पर फुलौरी बिंद शराब के नशे में मौजूद था। घायल बेलानी देवी की मौत हो गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर न्यायालय में फुलौरी बिंद और महबूब के खिलाफ आरोप पत्र प्रेषित किया। न्यायालय में मानिक चंद्र ने बयान दिया कि 27 अप्रैल 2011 को मेरी पाही पर मेरी पत्नी बलना देवी, मेरा लड़का सुनील और सढुआइन अवतारी देवी थीं। वहां शाम को छह बजे फुलौरी और उनके साथ एक आदमी आया। उसने बुखार से पीड़ित मेरे लड़के की ओझाई करने के लिए कहा। मेरे मना करने के बाद भी फुलौरी चावल मंगाकर ओझाई करने लगा और कहा कि भूत है ठेके पर चलो। उनके पीछे मैं भी केदारपुर शराब के ठेके पर चला गया। फूलौरी और उसका सहयोगी एक बोतल दारू पीने के बाद एक बोतल ले लिया। दोनों बेरासपुर में चार पेड़ा खरीदे और मुझे दो पेड़ा दिया। मैंने उक्त पेड़े को कुत्ते को डाल दिया। उसके बाद फुलौरी ने जबर्दस्ती एक पेड़ा मेरे मुंह में डाल दिया। कुछ देर बाद मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो मैं इलाहाबाद के एक अस्पताल में था। मेरे बेटे और मेरी पत्नी को मारकर हत्या कर दी गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और बहस को सुनने के बाद न्यायाधीश कुलदीप कुमार की अदालत ने फुलौरी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने महबूब को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला और उसके बेटे की हत्या मामले में दोषी को शनिवार को आजीवन कारावास की सजा दी। छह साल पूर्व घनश्यामपुर गांव के पाल बस्ती में हुई घटना में न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
घटना के मुताबिक, गोपीगंज थानाक्षेत्र के घनश्यामपुर निवासी रामचंद्र पाल ने आरोप लगाया था कि उसके भाई मानिकचंद्र पाल और उसका परिवार पाही पर रहता था। 26-27 अप्रैल 2011 की रात अज्ञात लोगों ने मेरे भाई के परिवार के सदस्य बेलानी देवी, अवतारी देवी और सुनील पाल को गंभीर रूप से मारपीट कर घायल कर दिया। वहां पर फुलौरी बिंद शराब के नशे में मौजूद था। घायल बेलानी देवी की मौत हो गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर न्यायालय में फुलौरी बिंद और महबूब के खिलाफ आरोप पत्र प्रेषित किया। न्यायालय में मानिक चंद्र ने बयान दिया कि 27 अप्रैल 2011 को मेरी पाही पर मेरी पत्नी बलना देवी, मेरा लड़का सुनील और सढुआइन अवतारी देवी थीं। वहां शाम को छह बजे फुलौरी और उनके साथ एक आदमी आया। उसने बुखार से पीड़ित मेरे लड़के की ओझाई करने के लिए कहा। मेरे मना करने के बाद भी फुलौरी चावल मंगाकर ओझाई करने लगा और कहा कि भूत है ठेके पर चलो। उनके पीछे मैं भी केदारपुर शराब के ठेके पर चला गया। फूलौरी और उसका सहयोगी एक बोतल दारू पीने के बाद एक बोतल ले लिया। दोनों बेरासपुर में चार पेड़ा खरीदे और मुझे दो पेड़ा दिया। मैंने उक्त पेड़े को कुत्ते को डाल दिया। उसके बाद फुलौरी ने जबर्दस्ती एक पेड़ा मेरे मुंह में डाल दिया। कुछ देर बाद मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो मैं इलाहाबाद के एक अस्पताल में था। मेरे बेटे और मेरी पत्नी को मारकर हत्या कर दी गई। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और बहस को सुनने के बाद न्यायाधीश कुलदीप कुमार की अदालत ने फुलौरी को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने महबूब को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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