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डोमोटेक्स (जर्मनी) में भाग लेंगे 4 सौ कालीन निर्यातक
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भदोही। जर्मनी के हनोवर शहर में 11 जनवरी से होने वाले फ्लोर कवरिंग के विश्व के सबसे बड़े फेयर डोमोटेक्स के लिए परिक्षेत्र के कालीन निर्यातक सात जनवरी से रवाना होंगे। फेयर में कुल 400 और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के बैनर तले 200 निर्यातक सदस्य भाग ले रहे हैं। भाग लेने वालों में लगभग 60 प्रतिशत लोग भदोही-वाराणसी परिक्षेत्र के हैं, जिन्होंने पिछले तीन माह से प्रदर्शित किए जाने वाले उत्पादों पर कड़ी मेहनत की है। सीईपीसी के अधिशासी निदेशक संजय कुमार ने बताया कि क्रिसमस और न्यू इयर दुनिया भर में खरीदारी का सीजन होता है। फेयर में 60 देशों के लगभग 14 सौ उत्पादक अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं। चार दिन के फेयर में 38 हजार विजिटर हमारे कालीन निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। कहा कि इन्हीं विजिटरों को लुभाने के लिए भारतीय निर्यातक तीन महीने से दिन रात काम कर रहे हैं। बताया कि परिषद ने परंपरा के अनुरूप डोमोटेक्स में आकर्षक भारतीय पवेलियन तैयार किया है, जिसमें भारतीय निर्यातकों को स्टॉल आवंटित किए गए हैं। परिषद के बैनर तले भागीदारी करने वाले निर्यातकों को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय प्रोत्साहन स्वरूप 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है। उन्होंने बताया इस बार सरकार प्रत्येक भागीदार फर्म के एक व्यक्ति को एयर टिकट भी उपलब्ध करा रही है जो अधिकतम 75 हजार रुपये तक हो सकता है।
निदेशक ने बताया कि इस फेयर में गंभीर खरीदार मिलते हैं। इसलिए इससे लोगों की उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। लोगों को लुभाने के लिए आकर्षक रंगामेजी, टेक्सचर और लुक्स वाले उत्पाद डोमोटेक्स ले जा रहे हैं। बताया कि वर्तमान में विश्व कालीन बाजार पर भारत की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसे निकट भविष्य में 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के नजरिए से भारत सरकार काम कर रही है। भारतीय निर्यातक भी इसके लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। सात जनवरी से लोगों के विभिन्न हवाई अड्डों से हनोवर रवाना होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
निदेशक ने बताया कि इस फेयर में गंभीर खरीदार मिलते हैं। इसलिए इससे लोगों की उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। लोगों को लुभाने के लिए आकर्षक रंगामेजी, टेक्सचर और लुक्स वाले उत्पाद डोमोटेक्स ले जा रहे हैं। बताया कि वर्तमान में विश्व कालीन बाजार पर भारत की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसे निकट भविष्य में 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के नजरिए से भारत सरकार काम कर रही है। भारतीय निर्यातक भी इसके लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। सात जनवरी से लोगों के विभिन्न हवाई अड्डों से हनोवर रवाना होने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
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