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ई-टेंडरिंग तो बहाना, लूट रहे सरकारी खजाना
Updated Sun, 09 Dec 2018 12:08 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले के सरकारी विभागों में ई-टेंडरिंग के बहाने सरकारी खजाने की लूट हो रही है। चहेतों को लाभ देने के लिए कई चरणों में काम को बांटकर मैनुअल से ही खेल किया जा रहा है। ताजा मामला नगर पंचायत ज्ञानपुर से आया, जिसे एडीएम ने निरस्त कर दिया। हालांकि लोक निर्माण विभाग, बिजली विभाग समेत दूसरे विभागों में गुपचुप तरीके से यह खेल चल रहा है।
सड़क, बिजली, स्वास्थ्य समेत अन्य विकास कार्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होता हैं। पूर्व के वर्षों में मैनुअल तरीके से निविदाएं फाइनल की जाती थीं। इसमें चहेतों को लाभ देने के लिए नियमों को ताख पर रख दिया जाता था। इससे कई लोगों के बजाए सत्ता में पकड़ रखने वाले एक ही व्यक्ति को सारा काम मिल जाता। निविदा को पारदर्शी बनाने के लिए एक साल पूर्व सूूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था को प्रभावी किया। इसकी शुरुआत भी सभी विभागों में शुरू हो गई। कई विभागों में अफसर एवं कर्मी अपने चहेतों को लाभ देने के लिए सरकार की मंशा को ही दरकिनार कर दे रहे हैं। ताजा उदाहरण ज्ञानपुर नगर पंचायत की ओर से देखने को मिला। यहां पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए गोपीपुर वार्ड में करीब 30 लाख का काम तीन खंडों में बांटकर मैनुअल कर दिया गया। हालांकि उक्त निविदा को एडीएम ने निरस्त कर दिया। इसी तरह बड़ाडीह में एक ही सड़क को तीन खंडों में बांटकर ठेकेदार मनमोहन सिंह फर्म को दे दिया गया। मामला संज्ञान में आने पर एडीएम ने उसे निरस्त किया।
क्या है ई-टेंडरिंग का मानक
ज्ञानपुर। सड़क, इंटरलाकिंग समेत अन्य कार्यों में 10 लाख से अधिक की निविदा होने पर ही ई-टेंडरिंग प्रभावी होता है। 11 लाख से लेकर कई करोड़ तक ई-टेंडरिंग से निविदा जारी की जाती है लेकिन भ्रष्टाचार में संलिप्त अफसर और कर्मी 50 से 60 लाख के कार्यों को कई चरणों में बांटकर 10 लाख तक सीमित कर देते हैं। इससे उसका ई-टेंडरिंग कराने के बजाए मैनुअल ही काम करा दिया जाता है।
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ई-टेंडरिंग शासन की प्राथमिकता में शामिल है। जो निविदाएं जारी होगी, वह राशि के हिसाब से तय होंगी। 10 लाख से अधिक की निविदा अगर कई खंड में होगी तो उसे निरस्त किया जाएगा। - राम सिंह वर्मा, एडीएम भदोही
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सड़क, बिजली, स्वास्थ्य समेत अन्य विकास कार्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होता हैं। पूर्व के वर्षों में मैनुअल तरीके से निविदाएं फाइनल की जाती थीं। इसमें चहेतों को लाभ देने के लिए नियमों को ताख पर रख दिया जाता था। इससे कई लोगों के बजाए सत्ता में पकड़ रखने वाले एक ही व्यक्ति को सारा काम मिल जाता। निविदा को पारदर्शी बनाने के लिए एक साल पूर्व सूूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था को प्रभावी किया। इसकी शुरुआत भी सभी विभागों में शुरू हो गई। कई विभागों में अफसर एवं कर्मी अपने चहेतों को लाभ देने के लिए सरकार की मंशा को ही दरकिनार कर दे रहे हैं। ताजा उदाहरण ज्ञानपुर नगर पंचायत की ओर से देखने को मिला। यहां पर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए गोपीपुर वार्ड में करीब 30 लाख का काम तीन खंडों में बांटकर मैनुअल कर दिया गया। हालांकि उक्त निविदा को एडीएम ने निरस्त कर दिया। इसी तरह बड़ाडीह में एक ही सड़क को तीन खंडों में बांटकर ठेकेदार मनमोहन सिंह फर्म को दे दिया गया। मामला संज्ञान में आने पर एडीएम ने उसे निरस्त किया।
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क्या है ई-टेंडरिंग का मानक
ज्ञानपुर। सड़क, इंटरलाकिंग समेत अन्य कार्यों में 10 लाख से अधिक की निविदा होने पर ही ई-टेंडरिंग प्रभावी होता है। 11 लाख से लेकर कई करोड़ तक ई-टेंडरिंग से निविदा जारी की जाती है लेकिन भ्रष्टाचार में संलिप्त अफसर और कर्मी 50 से 60 लाख के कार्यों को कई चरणों में बांटकर 10 लाख तक सीमित कर देते हैं। इससे उसका ई-टेंडरिंग कराने के बजाए मैनुअल ही काम करा दिया जाता है।
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ई-टेंडरिंग शासन की प्राथमिकता में शामिल है। जो निविदाएं जारी होगी, वह राशि के हिसाब से तय होंगी। 10 लाख से अधिक की निविदा अगर कई खंड में होगी तो उसे निरस्त किया जाएगा। - राम सिंह वर्मा, एडीएम भदोही