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ओडीएफ: लक्ष्य से पांच हजार दूर, 50 हजार अपूर्ण
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:32 AM IST
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ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन अभियान पर जिले में अब तक 168 करोड़ से अधिक खर्च हो गए, लेकिन गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने का सपना साकार होता नहीं दिख रहा। विभाग का दावा है कि दो अक्टूबर तक जिले को खुले में शौच से मुक्त करने से मात्र पांच हजार शौचालय दूर हैं जबकि सच्चाई यह है कि जिन गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, वहां 50 हजार से अधिक शौचालय अधूरे हैं। किसी की छत नहीं बनी तो किसी में दरवाजा लगाने का काम पूरा नहीं किया गया। ऐसे में ये शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं। 2014 में केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता मिशन को एक अभियान तरह शुरू करने का निर्देश दिया था। उसके तहत जिले में गंगा से सटे 46 गांवों को शुरुआती दौर में ओडीएफ बनाया गया। उसके बाद ब्लॉकवार गांवों का चयन कर उन्हें ओडीएफ बनाने की मुहिम शुरू की गई। आने वाले दो अक्टूबर तक जिले को ओडीएफ बना देना है। जिला पंचायत राज विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो दो लाख 40 हजार शौचालयों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक दो लाख 35 हजार शौचालय बन चुके हैं, जिनमें 2014 के बाद करीब 1.40 लाख शौचालय बनाए गए। दावा है कि 1091 राजस्व गांवों में से 735 को ओडीएफ घोषित कर लिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे जुदा है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने ज्ञानपुर ब्लॉक के ओडीएफ गांव सरई राजपुुतानी गांव में जायजा लिया तो कड़वी हकीकत सामने आई। गांव में वैसे तो 300 से अधिक शौचालय आवंटित हुए हैं। जिनमें 200 से अधिक शौचालय बन भी गए हैं, लेकिन उनमें बड़ी संख्या में शौचालय अब भी अपूर्ण हैं। ठाकुर बस्ती में जितेंद्र सिंह और राजा सिंह केे आवंटित शौचालयों की अब तक छत नहीं पड़ी है। इसी तरह दलित बस्ती में तूफानी गौतम, डंगरा देवी समेत अन्य लाभार्थियों के शौचालय भी अपूर्ण हैं। ग्राम प्रधान वाजिद ने कहा कि बारिश के चलते काम रुका था। उसे जल्द पूर्ण करा लिया जाएगा। इसी तरह औराई क्षेत्र के अधिसंख्य गांवों में बने शौचालयों में न तो सोख्ता बने हैं और न ही उस पर छत पड़ी है। बासदेवपुर गांव में ओडीएफ का जायजा लेने पर पता चला कि लाभार्थी धरमदेव, राजेश दूबे, सत्यदेव उपाध्याय, गिरजा देवी के शौचालय आठ माह पूर्व बनकर तैयार हैं, लेकिन छत अब तक नहीं पड़ सकी है। ग्राम प्रधान भुल्लन ने पहले तो पैसा न आने की बात कही, लेकिन बाद में बताया कि लाभार्थी खुद बनवा लें, पैसा दे दिया जाएगा। बीडीओ श्याम जी को जब हकीकत के बारे में बताया गया तो वह चौंक गए। कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। जिले के यह दो ओडीएफ गांव तो बानगी हैं। कमोबेश ज्यादातर ओडीएफ गांवों की यही स्थिति है।
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