{"_id":"596a69434f1c1b0c2f8b465e","slug":"71500145987-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दागदार संस्थाओं पर मेहरबान महकमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दागदार संस्थाओं पर मेहरबान महकमा
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्ञानपुर (भदोही)। यूनिफार्म वितरण को लेकर विवादों में रहने वाली फर्मों पर एक बार फिर विभाग मेहरबान हो गया है। संकुल से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी तक वितरण में होने वाली खामियों को छुपाने में जुट गए हैं। 2015 में ड्रेस वितरण में गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन सीडीओ ने जिन संस्थाओं के वितरण पर रोक लगाई थी, उन्हीं से एक बार फिर बच्चों का यूनिफार्म एसएमसी के माध्यम से लिया जा रहा है। तत्कालीन जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु भी यूनिफार्म मानक के अनुसार न होने पर संस्थाओं के 25 फीसदी फीसदी भुगतान पर रोक लगा दी थी।
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की ओर से हर साल जुलाई में दो सेट नया यूनिफार्म दिया जाता है। जिले के करीब एक लाख 42 हजार बच्चों के यूनिफार्म पर करीब सवा छह करोड़ रुपये खर्च किया जाना है। सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को लगा कि यूनिफार्म वितरण का माहौल पारदर्शी होगा लेकिन बसपा और सपा शासन की तर्ज पर ही यूनिफार्म का वितरण शुरू हो गया है। 2014, 2015 और 2016 में यूनिफार्म वितरण के दौरान विवादों में रहने वाली आठ संस्थाओं को एक बार फिर ड्रेस आपूर्ति की जिम्मेदारी दे दी गई है। इसको लेकर विरोध की आवाज भी बुलंद होने लगी हैं। छात्रनेता रमेश यादव दद्दा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर यूनिफार्म वितरण करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की मांग की। पत्रक में आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारियों की कृपा से बच्चों के यूनिफार्म वितरण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है। सिलाई के बजाए सीधे रेडीमेंट दूकानों से ड्रेस खरीदकर स्कूलों में पहुंचाया जा रहा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि यूनिफार्म वितरण की जिम्मेदारी एसएमसी को दिया गया है। एसएमसी कहां से आपूर्ति कर रही है यह वही जाने। जांच में यूनिफार्म सही न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की ओर से हर साल जुलाई में दो सेट नया यूनिफार्म दिया जाता है। जिले के करीब एक लाख 42 हजार बच्चों के यूनिफार्म पर करीब सवा छह करोड़ रुपये खर्च किया जाना है। सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को लगा कि यूनिफार्म वितरण का माहौल पारदर्शी होगा लेकिन बसपा और सपा शासन की तर्ज पर ही यूनिफार्म का वितरण शुरू हो गया है। 2014, 2015 और 2016 में यूनिफार्म वितरण के दौरान विवादों में रहने वाली आठ संस्थाओं को एक बार फिर ड्रेस आपूर्ति की जिम्मेदारी दे दी गई है। इसको लेकर विरोध की आवाज भी बुलंद होने लगी हैं। छात्रनेता रमेश यादव दद्दा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर यूनिफार्म वितरण करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की मांग की। पत्रक में आरोप लगाया कि खंड शिक्षा अधिकारियों की कृपा से बच्चों के यूनिफार्म वितरण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है। सिलाई के बजाए सीधे रेडीमेंट दूकानों से ड्रेस खरीदकर स्कूलों में पहुंचाया जा रहा है।
विज्ञापन
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि यूनिफार्म वितरण की जिम्मेदारी एसएमसी को दिया गया है। एसएमसी कहां से आपूर्ति कर रही है यह वही जाने। जांच में यूनिफार्म सही न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन