{"_id":"5c3e2470bdec2273356ef5d8","slug":"61547576432-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा माफियाओं तक क्यों नहीं पहुंच रहे अधिकारियों के हाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा माफियाओं तक क्यों नहीं पहुंच रहे अधिकारियों के हाथ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ज्ञानपुर (भदोही)। शनिवार को लखनो गांव के समीप स्थित एससी कान्वेंट स्कूल की गैस किट वाली वैन में आग लगने के बाद भी अधिकारियों के हाथ शिक्षा माफियाओं तक पहुंचने में हिचकिचा रहे हैं। कुछ विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन अब भी जिले में सौ से ज्यादा अमान्य विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
जनपद का सबसे बड़े ब्लॉक ज्ञानपुर में हाईवे से लेकर तटवर्ती क्षेत्र तक मानक के विपरीत स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। अहम बात यह है कि मड़हे और दो कक्षीय भवनों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। जानकारों का कहना है कि सूफीनगर, गोधना, सुधवैं, वहिदानगर मोड़, धन तुलसी, इटहरा, बेरवांपहाड़पुर, कोइरौना, सुभाषनगर, नवधन, रोही, पिलखुना, रजमला, दरवांसी, मुंगरहा, मंगापट्टी, दौरियाही, मऊरामशाला, दुगुना, सीतामढ़ी, राजापुर-मैलौना, जंगीगंज, खेदौपुर, कुलमनपुर आदि गांवों में संचालित स्कूल किसी मानक को पूरा नहीं कर रहे। इन पर कार्रवाई की जाए तो आगे होने वाली घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
--
अटकी रहती है अभिभावकों की जान
अवैध व बगैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले अभिभावकों की जान उस समय तक अटकी रहती है जब तक उनके नौनिहाल घर नहीं पहुंच जाते। तो वहीं नए स्कूलों की स्थापना और सत्र बदलते ही संचालक अभिभावकों के यहां दस्तक देकर तरह-तरह के प्रलोभन देकर बच्चों का पंजीकरण कर लेते हैं। उसके बाद न तो उनके पास देखरेख का समय मिलता है और न ही वाहनों के मेंटीनेंस आदि का।
विज्ञापन
--
बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जैसे-जैसे पता चलेगा, वैसे-वैसे इन विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रहेगी।
अमित कुमार सिंह, बीएसए
जनपद का सबसे बड़े ब्लॉक ज्ञानपुर में हाईवे से लेकर तटवर्ती क्षेत्र तक मानक के विपरीत स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। अहम बात यह है कि मड़हे और दो कक्षीय भवनों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। जानकारों का कहना है कि सूफीनगर, गोधना, सुधवैं, वहिदानगर मोड़, धन तुलसी, इटहरा, बेरवांपहाड़पुर, कोइरौना, सुभाषनगर, नवधन, रोही, पिलखुना, रजमला, दरवांसी, मुंगरहा, मंगापट्टी, दौरियाही, मऊरामशाला, दुगुना, सीतामढ़ी, राजापुर-मैलौना, जंगीगंज, खेदौपुर, कुलमनपुर आदि गांवों में संचालित स्कूल किसी मानक को पूरा नहीं कर रहे। इन पर कार्रवाई की जाए तो आगे होने वाली घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विज्ञापन
--
अटकी रहती है अभिभावकों की जान
अवैध व बगैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले अभिभावकों की जान उस समय तक अटकी रहती है जब तक उनके नौनिहाल घर नहीं पहुंच जाते। तो वहीं नए स्कूलों की स्थापना और सत्र बदलते ही संचालक अभिभावकों के यहां दस्तक देकर तरह-तरह के प्रलोभन देकर बच्चों का पंजीकरण कर लेते हैं। उसके बाद न तो उनके पास देखरेख का समय मिलता है और न ही वाहनों के मेंटीनेंस आदि का।
विज्ञापन
--
बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जैसे-जैसे पता चलेगा, वैसे-वैसे इन विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रहेगी।
अमित कुमार सिंह, बीएसए