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सर्वे में गड़बड़ी के चलते मिशन इंद्रधनुष फेल
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:40 AM IST
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ज्ञानपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मिशन इंद्रधनुष जिले में पूरी तरह कारगर साबित होती नहीं दिख रही है। टीकाकरण से वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं का सही चिह्नांकन नहीं होने से अब भी लोग टीकाकरण से वंचित हो रहे हैं। जिले में चिह्नांकन की जिम्मेदारी आशा बहुओं को दी गई थी। मगर उन्होंने घर बैठे ही सर्वे का कार्य पूरा कर लिया। इसके चलते टीकाकरण से वंचित लोगों का सही आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। हालांकि विभाग 85 फीसदी टीकाकरण का दावा कर रहा है। जिले में टीकाकरण से वंचित 14 हजार बच्चे और गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया था। अब तक मिशन इंद्रधनुष के तहत 6600 और आरआई के तहत 9800 का टीकाकरण हो चुका है। कुल मिलाकर 16 हजार से अधिक बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अब तक 85 फीसदी लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। सवाल उठता है कि अब तक 14 हजार ही टीकाकरण से वंचित हैं तो 16000 से अधिक का टीकाकरण कैसे हो गया। इसके बाद भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। अभी भी 85 फीसदी लक्ष्य पूरा हो सका है। जब सर्वे ठीक से हुआ ही नहीं तो शेष 15 फीसदी लक्ष्य कैसे पूरा होगा। केंद्र सरकार ने सात जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीके से वंचित बच्चे और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाने के लिए मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम जिले में अक्टूबर से ही चलाया जा रहा है। हर महीने के सात तारीख से एक सप्ताह तक घर-घर जाकर टीके से वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जाते हैं। वैसे भी सभी सरकारी अस्पतालों में सप्ताह में दो दिन टीके लगाए जाते हैं। इसके बाद भी काफी संख्या में बच्चे और गर्भवती महिलाएं टीके से वंचित हैं। इन्हीं के लिए चलाया गया मिशन इंद्रधनुष अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से कारगर साबित होता नहीं दिखाई दो रहा है। अधिकारी और कर्मचारी इस योजना को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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