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Bhadohi News: 11.81 करोड़ से मॉडल बने 59 गांव, टूटी नालियां और खराब सड़कें कर रहीं बदनाम

Sat, 06 Jun 2026 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:19 AM IST
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59 villages made models with 11.81 crore rupees, broken drains and bad roads are giving them a bad name
जमुनीपुर के मोढ़ डीह में पानी निकासी की टूटी नाली। संवाद
ज्ञानपुर। स्वच्छ भारत मिशन के फेज-दो के तहत वर्ष 2022 में पांच हजार से अधिक आबादी वाली 12 ग्राम पंचायतों और वर्ष 2023 में गंगा से सटी 47 ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव का दर्जा दिया गया। इन गांवों में राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त के अलावा 11.81 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए गए। दावा किया गया कि रिसोर्स रिकवरी सेंटर बनाकर कूड़ा निस्तारण, जल निकासी और सड़कों की व्यवस्था बेहतर की गई है, लेकिन धरातल पर कई स्थानों पर टूटी नालियां, गंदगी और खराब सड़कें दिखाई देती हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मॉडल गांवों में मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। जिले में कुल 546 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2022 में चयनित गांवों पर 4.81 करोड़ रुपये तथा गंगा से सटी ग्राम पंचायतों पर सात करोड़ रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2024 और 2025 में शेष सभी ग्राम पंचायतों को मॉडल गांव बनाने की मुहिम शुरू की गई। पूर्व में चयनित गांवों में भारी बजट खर्च किया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शुक्रवार को छह मॉडल गांवों की पड़ताल की।
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इसमें जमुनीपुर अठगवां, बैरीबीसा, मूंसीलाटपुर, औराई का कैयरमऊ, कोइलरा आदि गांव शामिल रहे। अधिकांश गांवों में आज भी सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है। करीब ढाई वर्ष बाद भी इन ग्राम पंचायतों में सड़क, शुद्ध पेयजल और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
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मॉडल गांव में ये सुविधाएं होनी चाहिए

इन गांवों को कूड़ा, गंदगी, जलजमाव और अन्य समस्याओं से मुक्त रखना, सड़क और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करना, नालियों एवं सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना, ठोस और गीले कचरे का प्रबंधन सुनिश्चित करना, हैंडपंपों के पास सोख्ता पिट का निर्माण कराना तथा कचरे के निस्तारण के लिए कूड़ा प्रबंधन केंद्र स्थापित करना आवश्यक है। लेकिन कई गांवों में हालत खराब है।
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जमुनीपुर अठगवां में राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त से अच्छा-खासा बजट मिलता है। मॉडल गांव के नाम पर भी पैसा खर्च किया गया, लेकिन अब भी कई बस्तियों तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। - गोलू, पुरानी मोढ़
मुस्लिम बस्तियों में विकास नहीं हो सका है। कुछ स्थानों पर आधी सड़कें बनाकर छोड़ दी गई हैं, जिससे लोगों को दिक्कत होती है। पुरानी बाजार में जल निकासी की सुविधा नहीं हो सकी है। - इमरान खान, पुरानी मोढ़

मॉडल गांवों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर बनाए गए हैं। सफाईकर्मियों की कमी के कारण दिक्कत हो रही है। जो काम अधूरे हैं, उनका निरीक्षण कर उन्हें पूरा कराया जाएगा। - डॉ. सपना अवस्थी, प्रभारी डीपीआरओ
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