{"_id":"5c8942d0bdec221401276e8f","slug":"51552499408-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंडिया कारपेट एक्सपो-1","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंडिया कारपेट एक्सपो-1
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
भदोही। इंडिया कारपेट एक्सपो में भाग लेने भारत आए स्वीडेन के प्रमुख कालीन आयातक लार्स कालस्ट्राम ने कहा कि हाथ के बने कालीनों में भदोही के लोग माहिर हैं। दूसरे देशों के मुकाबले यहां के हस्तनिर्मित कालीन न केवल सस्ते हैं, बल्कि मानकों पर भी खरा उतरते हैं। कहा ढांचागत रूप से भदोही पिछड़ा है, इसलिए मैं वाराणसी में ही कारपेट एक्सपो के आयोजन के पक्ष में हूं। वे मंगलवार की शाम प्रमुख कालीन निर्यातक नीरज गुप्ता के गेस्टहाउस पर अमर उजाला से बातचीत कर रहे थे।
लार्स बुधवार को दोपहर नगर के आनंद नगर गजिया रेलवे फाटक पर 20 मिनट तक जाम में फंसे रहे। फाटक खुला तो जाम में फंस गए। उन्होंने कार में बैठकर जाम की फोटोग्राफी कर समय बिताया। तीन वर्ष से अधूरे पड़े रेलवे क्रॉसिंग के ओवरब्रिज पर सवाल खड़े किए। आश्चर्य जताते हुए कहा कि मुझे बताया गया कि राजनीतिक कारणों से यह आरओबी नहीं बन पा रहा है। कहा कि भदोही की सड़कों में सुधार तो हुआ है, लेकिन ढांचागत व्यवस्था और चुस्त दुरुस्त होनी चाहिए।
लार्स ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान से वर्षों व्यवसाय किया, लेकिन सुरक्षा कारणों से अब केवल भारत से व्यवसाय कर रहे हैं। हाथ से बने कालीनों में भदोही के बुनकर माहिर हैं। पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, नेपाल आदि देशों से भदोही के कालीन सस्ते होने के साथ साथ उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। बताया कि व्यवसाय के लिए 1980 से भदोही और चीन का दौरा कर रहे हैं, लेकिन इन वर्षों में चीन में ऊंची ऊंची बिल्डिंगें देखने को मिलती हैं, जबकि भदोही में अब भी ढांचागत सुविधाओं की कमी है। भदोही में कारपेट एक्सपो के आयोजन के सवाल पर कहा कि मैं वाराणसी में एक्सपो आयोजन के पक्ष में हूं। वाराणसी ऐतिहासिक शहर है। यहां का इतिहास किसी को भी आकर्षित कर सकता है। ढांचागत व्यवस्थाओं में वाराणसी, भदोही से बेहतर है।
लार्स बुधवार को दोपहर नगर के आनंद नगर गजिया रेलवे फाटक पर 20 मिनट तक जाम में फंसे रहे। फाटक खुला तो जाम में फंस गए। उन्होंने कार में बैठकर जाम की फोटोग्राफी कर समय बिताया। तीन वर्ष से अधूरे पड़े रेलवे क्रॉसिंग के ओवरब्रिज पर सवाल खड़े किए। आश्चर्य जताते हुए कहा कि मुझे बताया गया कि राजनीतिक कारणों से यह आरओबी नहीं बन पा रहा है। कहा कि भदोही की सड़कों में सुधार तो हुआ है, लेकिन ढांचागत व्यवस्था और चुस्त दुरुस्त होनी चाहिए।
विज्ञापन
लार्स ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान से वर्षों व्यवसाय किया, लेकिन सुरक्षा कारणों से अब केवल भारत से व्यवसाय कर रहे हैं। हाथ से बने कालीनों में भदोही के बुनकर माहिर हैं। पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, नेपाल आदि देशों से भदोही के कालीन सस्ते होने के साथ साथ उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। बताया कि व्यवसाय के लिए 1980 से भदोही और चीन का दौरा कर रहे हैं, लेकिन इन वर्षों में चीन में ऊंची ऊंची बिल्डिंगें देखने को मिलती हैं, जबकि भदोही में अब भी ढांचागत सुविधाओं की कमी है। भदोही में कारपेट एक्सपो के आयोजन के सवाल पर कहा कि मैं वाराणसी में एक्सपो आयोजन के पक्ष में हूं। वाराणसी ऐतिहासिक शहर है। यहां का इतिहास किसी को भी आकर्षित कर सकता है। ढांचागत व्यवस्थाओं में वाराणसी, भदोही से बेहतर है।
विज्ञापन