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तालाब पर बने चार भवनों को ढहाया, हड़कंप
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मोढ़। क्षेत्र के बलिभद्रपुर गांव में बृहस्पतिवार को पुलिस और प्रशासन की टीम ने तालाब की जमीन पर बने चार भवनों को ढहा दिया। इससे गांव में खलबली मच गई। घर गिरने से चार परिवार के लोग खुले आसमान के नीचे आ गए।
बलिभद्रपुर गांव के पारस प्रजापति, अमृतलाल प्रजापति, शोभनाथ प्रजापति और शीतला प्रजापति दशकों पूर्व घर बनाकर रहते हैं। आरोप है कि जहां उनका घर बना था, वह तालाब की जमीन थी। गांव के ही चचेरे भाई रमेश प्रजापति ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर घरों को गिराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को दोपहर तीन बजे भदोही एसडीएम मयफोर्स गांव में पहुंचे। चारों घरों को जेसीबी लगाकर ढहाया। करीब तीन घंटे तक पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से गांव में खलबली मची रही। बताया जाता है कि चचेरे भाई रमेश प्रजापति से रास्ते को लेकर विवाद था, जिसका निस्तारण न होने पर उसने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई। वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों के मकान गिरे हैं, उन पर मानो मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा हो। आशियाना उजड़ने से सभी खुले आसमान के नीचे जीवन यापन को मजबूर हो गए हैं।
धर्मेन्द्र पाल/पंकज चौबे
बलिभद्रपुर गांव के पारस प्रजापति, अमृतलाल प्रजापति, शोभनाथ प्रजापति और शीतला प्रजापति दशकों पूर्व घर बनाकर रहते हैं। आरोप है कि जहां उनका घर बना था, वह तालाब की जमीन थी। गांव के ही चचेरे भाई रमेश प्रजापति ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर घरों को गिराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को दोपहर तीन बजे भदोही एसडीएम मयफोर्स गांव में पहुंचे। चारों घरों को जेसीबी लगाकर ढहाया। करीब तीन घंटे तक पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से गांव में खलबली मची रही। बताया जाता है कि चचेरे भाई रमेश प्रजापति से रास्ते को लेकर विवाद था, जिसका निस्तारण न होने पर उसने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई। वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों के मकान गिरे हैं, उन पर मानो मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा हो। आशियाना उजड़ने से सभी खुले आसमान के नीचे जीवन यापन को मजबूर हो गए हैं।
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धर्मेन्द्र पाल/पंकज चौबे