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Bhadohi News: 50 फीसदी शाैचालयों का नहीं हो रहा इस्तेमाल
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ज्ञानपुर। जिले के सभी गांव खुले में शाैचमुक्त घोषित हो चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 50 फीसदी शौचालयों का उपयोग ही नहीं हो रहा है। भदोही ब्लॉक के अनेगपुर, कोल्हण और औराई के सरई मिश्रानी गांव इसकी नजीर हैं।
स्वच्छता मिशन के तहत वर्ष 2012-13 में सरकार की ओर से बेसलाइन सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट में 1995 से लाभान्वित 70 हजार परिवारों को छोड़कर करीब डेढ़ लाख परिवारों को शामिल किया गया था। इसी आंकड़े के आधार पर डेढ़ लाख से अधिक शौचालयों का आवंटन किया गया। इसके लिए शासन से 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बेसलाइन सर्वे के अनुसार जनपद के सभी गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। शौचालयों का निर्माण इतना घटिया कराया गया है कि उसका उपयोग लोग नहीं कर पा रहे हैं। गुजरे चार साल में हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराए गए। तीन साल में 15 हजार नए व्यक्गित शौचालय भी बनाए गए, लेकिन आठ से नौ साल पूर्व के बने एकल शौचालय बेकार हो चुके हैं। रेट्रोफिटिंग के नाम पर तीन से चार साल में आठ-नौ हजार शौचालयों की मरम्मत कराई गई, लेकिन वह भी नाकाफी ही साबित हुआ। पंचायत राज विभाग के पास वास्तविक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन दो लाख 81 हजार एकल शौचालयों में 50 फीसदी की हालत ठीक नहीं है। कहीं कबाड़ रखा जा रहा है तो कहीं भूंसा रखा गया है। जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि खराब शौचालयों की मरम्मत कराई जा रही है। 2024 में भी सर्वे कराया जाएगा। इन पर 500 से लेकर पांच हजार रूपये तक खर्च किए जाएंगे। लगातार लोगों को जागरूक किया गया। अब पहले जैसी स्थिति नहीं रह गई है। शत प्रतिशत महिलाएं शौचालय जाती हैं।
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स्वच्छता मिशन के तहत वर्ष 2012-13 में सरकार की ओर से बेसलाइन सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट में 1995 से लाभान्वित 70 हजार परिवारों को छोड़कर करीब डेढ़ लाख परिवारों को शामिल किया गया था। इसी आंकड़े के आधार पर डेढ़ लाख से अधिक शौचालयों का आवंटन किया गया। इसके लिए शासन से 200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बेसलाइन सर्वे के अनुसार जनपद के सभी गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। शौचालयों का निर्माण इतना घटिया कराया गया है कि उसका उपयोग लोग नहीं कर पा रहे हैं। गुजरे चार साल में हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराए गए। तीन साल में 15 हजार नए व्यक्गित शौचालय भी बनाए गए, लेकिन आठ से नौ साल पूर्व के बने एकल शौचालय बेकार हो चुके हैं। रेट्रोफिटिंग के नाम पर तीन से चार साल में आठ-नौ हजार शौचालयों की मरम्मत कराई गई, लेकिन वह भी नाकाफी ही साबित हुआ। पंचायत राज विभाग के पास वास्तविक आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन दो लाख 81 हजार एकल शौचालयों में 50 फीसदी की हालत ठीक नहीं है। कहीं कबाड़ रखा जा रहा है तो कहीं भूंसा रखा गया है। जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि खराब शौचालयों की मरम्मत कराई जा रही है। 2024 में भी सर्वे कराया जाएगा। इन पर 500 से लेकर पांच हजार रूपये तक खर्च किए जाएंगे। लगातार लोगों को जागरूक किया गया। अब पहले जैसी स्थिति नहीं रह गई है। शत प्रतिशत महिलाएं शौचालय जाती हैं।
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