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प्रयोगशाला पर खर्च हुए 50 लाख बेकार

Mon, 20 Dec 2021 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Dec 2021 12:27 AM IST
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50 lakh wasted on the laboratory
जिले में बाल वैज्ञानिकों की फौज तैयार करने का सरकारी सपना धूमिल हो गया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खुले राजकीय हाईस्कूल में प्रयोगशाला पर करीब 50 लाख खर्च हो गए, लेकिन विषय विशेषज्ञ शिक्षक न होने से सब कुछ शोपीस बन कर रह गया है। पांच से सात वर्ष से रखे रसायन और उपकरण बेकार हो चुके हैं।
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ग्रामीण अंचलों में छात्र-छात्राओं को हाईस्कूल में पढ़ने के लिए दिक्कत न हो, इसके लिए एक दशक पूर्व सूबे के तत्कालीन शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने जिले के 33 पूर्व माध्यमिक विद्यालय को उच्चीकृत कर राजकीय हाईस्कूल का दर्जा दिलाया। उच्चीकृत पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के भवन निर्माण पर 58-58 लाख की धनराशि खर्च हुई। विज्ञान विषय से पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रयोगशाला की सुविधा के लिए प्रत्येक स्कूल पर एक लाख 50 हजार की रकम खर्च की गई। धीरे-धीरे प्रयोगशाला में उपकरण तो आ गए, लेकिन दशक भर बाद भी अधिकतर स्कूलों में विज्ञान शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। इससे प्रयोगशालाओं में रखे सभी उपकरण शोपीस बन कर रह गए हैं। जिले में 33 राजकीय हाईस्कूल और तीन राजकीय इंटर कॉलेज संचालित हैं। वीएनजीआईसी, जीआईसी जगन्नाथपुर, महराजगंज को छोड़ दिया जाए तो 33 राजकीय हाईस्कूलों में स्थिति सबसे खराब है। दो से तीन राजकीय स्कूलों को छोड़ दें तो अन्य में छात्र-छात्राओं की संख्या भी नाममात्र की रह गई है। इसमें राजकीय हाईस्कूल लालानगर, सदौपुर, लालीपुर, हरिहरपुर आदि शामिल हैं, जहां छात्र संख्या 50 से 80 तक ही सीमित हैं। जिले के राजकीय हाईस्कूलों में विषयवार शिक्षकों की तैनाती की जाए तो प्रधानाचार्य समेत 300 शिक्षक होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह संख्या मात्र 115 ही है। इससे पठन-पाठन से लेकर अन्य गतिविधियां भी स्कूलों में प्रभावित होती हैं। डीआईओएस एनएल गुप्ता का कहना है कि राजकीय हाईस्कूल में शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए पत्र लिखा गया है। एक साल पूर्व की नियुक्ति में शिक्षक मिले हैं, लेकिन अब भी कमी है। शिक्षकों का चयन शासन स्तर से ही होगा।
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