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मीठा जहर पीने को मजबूर सवा लाख की आबादी
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सीतामढ़ी। जिले के गंगा तटीय कोनिया क्षेत्र के दर्जनों गांवों की लगभग सवा लाख की आबादी दूषित पानी पीने को विवश है। तीन दशक से गंगा तटीय गांवों के लोग अत्यधिक आयरन और आर्सेनिक युक्त पानी पी कर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
क्षेत्र की समूह पेयजल योजनाएं खराब दशा में हैं। पूरे क्षेत्र में एक निश्चित लेवल पर भू-जल दूषित है, जिससे हजारों की संख्या में स्थापित सरकारी और निजी हैंडपंपों से दूषित पानी निकलता है। कहीं आर्सेनिक युक्त तो कहीं अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। ग्रामीण बताते है कि हैंडपंपों का पानी थोड़ी ही देर में पीला हो कर दुर्गंध देने लगता है। यह पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है लेकिन कोनिया के लोगों को दूषित पानी पीना विवशता है। विशेषज्ञ बताते है कि आर्सेनिक युक्त पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है। हालांकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पाइप लाइनें बिछाने और टंकी बनाने का काम चल रहा है, जिससे लोग आशान्वित हैं कि अब उन्हें दूषित पेयजल से छुटकारा मिल जाएगा। करीब डेढ़ दशक पूर्व जल निगम की ओर से कराए गए जांच में छेछुआ और कलिक मवैया ग्राम सभा में आर्सेनिक युक्त पानी की पुष्टि हुई थी। जबकि अन्य कई ग्राम सभाओं के हैंड पंपों के पानी मे अत्यधिक आयरन पाया गया था। छेछुआ के पूर्व ग्राम प्रधान जगदीश सिंह और अमर बहादुर सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों की टीम गांव में आकर ग्रामीणों को हैंड पंपों का पानी न पीने का सलाह दे गए थे। साथ ही अत्यधिक गहराई वाले बोरिंग के ट्यूबवेल की स्थापना कर शुद्धपेयजल उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था लेकिन अधिकारियों का आश्वासन झूठा साबित हुआ।
इन गांवों का भूजल है दूषित
सीतामढ़ी। कोनिया के गंगा तटीय गांव छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, हरिरामपुर, गजाधरपुर, बसगोती मवैया,कलातुलसी, महरच्छ तुलसी, धनतुलसी, भदरांव, मवैयाथानसिंह, इटहरा, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शांतिपुर, बहपूरा, शेरपुर, डीघ, कटरा बाजार, तलवा, शांतिपुर, दुगुना, परसनी, भटगवा, खेमापुर, अरई, बनकट, नारेपार, बारीपुर आदि गंगा तटीय गावों के हैंडपंपो से दूषित पानी निकलता है।
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कोट...
जल जीवन मिशन से हर गांव में पेयजल टंकी की स्थापना की जा रही है। जिससे हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचेगा। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। - मुजीब अहमद, एक्सईएन जल निगम
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क्षेत्र की समूह पेयजल योजनाएं खराब दशा में हैं। पूरे क्षेत्र में एक निश्चित लेवल पर भू-जल दूषित है, जिससे हजारों की संख्या में स्थापित सरकारी और निजी हैंडपंपों से दूषित पानी निकलता है। कहीं आर्सेनिक युक्त तो कहीं अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। ग्रामीण बताते है कि हैंडपंपों का पानी थोड़ी ही देर में पीला हो कर दुर्गंध देने लगता है। यह पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है लेकिन कोनिया के लोगों को दूषित पानी पीना विवशता है। विशेषज्ञ बताते है कि आर्सेनिक युक्त पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है। हालांकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव पाइप लाइनें बिछाने और टंकी बनाने का काम चल रहा है, जिससे लोग आशान्वित हैं कि अब उन्हें दूषित पेयजल से छुटकारा मिल जाएगा। करीब डेढ़ दशक पूर्व जल निगम की ओर से कराए गए जांच में छेछुआ और कलिक मवैया ग्राम सभा में आर्सेनिक युक्त पानी की पुष्टि हुई थी। जबकि अन्य कई ग्राम सभाओं के हैंड पंपों के पानी मे अत्यधिक आयरन पाया गया था। छेछुआ के पूर्व ग्राम प्रधान जगदीश सिंह और अमर बहादुर सिंह ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों की टीम गांव में आकर ग्रामीणों को हैंड पंपों का पानी न पीने का सलाह दे गए थे। साथ ही अत्यधिक गहराई वाले बोरिंग के ट्यूबवेल की स्थापना कर शुद्धपेयजल उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था लेकिन अधिकारियों का आश्वासन झूठा साबित हुआ।
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इन गांवों का भूजल है दूषित
सीतामढ़ी। कोनिया के गंगा तटीय गांव छेछुआ, भुर्रा, कलिक मवैया, हरिरामपुर, गजाधरपुर, बसगोती मवैया,कलातुलसी, महरच्छ तुलसी, धनतुलसी, भदरांव, मवैयाथानसिंह, इटहरा, कूड़ी कला, कूड़ी खुर्द, शांतिपुर, बहपूरा, शेरपुर, डीघ, कटरा बाजार, तलवा, शांतिपुर, दुगुना, परसनी, भटगवा, खेमापुर, अरई, बनकट, नारेपार, बारीपुर आदि गंगा तटीय गावों के हैंडपंपो से दूषित पानी निकलता है।
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कोट...
जल जीवन मिशन से हर गांव में पेयजल टंकी की स्थापना की जा रही है। जिससे हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचेगा। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। - मुजीब अहमद, एक्सईएन जल निगम